जबलपुर। जिले में रबी सीजन की तैयारी शुरू होते ही मटर, चना और मसूर की बोवनी के लिए डीएपी तथा यूरिया की मांग तेजी से बढ़ गई है। हालांकि विपणन अधिकारियों का दावा है कि इस बार खाद की कोई कमी नहीं होगी, लेकिन सरकारी जमीन के रकबा सत्यापन के नए नियमों ने अन्नदाताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसान अपनी ऋण पुस्तिका लेकर पंजीयन कराने के लिए भटक रहे हैं, क्योंकि ग्रामीण अंचलों में समय पर पटवारी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं और ऑनलाइन सर्वर ठप रहने से प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इसके चलते पात्र किसानों को टोकन व परमिट मिलने में भारी देरी हो रही है। विपणन गोदामों में खाद का पर्याप्त भंडार दर्ज होने के बावजूद वितरण प्रणाली और परिवहन व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाई है। नतीजा यह है कि बुआई का नाजुक समय नजदीक आते ही किसान उर्वरक हासिल करने के लिए परेशान घूम रहे हैं।
पटवारी न मिलने से पंजीयन प्रक्रिया अटकी
जिले भर में रबी फसलों की बोवनी के लिए खेतों की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। नियमानुसार किसान को अपनी ऋण पुस्तिका में दर्ज भूमि के रकबे के आधार पर ही डीएपी एवं यूरिया उपलब्ध कराया जाना तय किया गया है। इस व्यवस्था के तहत किसानों को सबसे पहले पंजीयन कराना अनिवार्य है। जमीनी हकीकत यह है कि गांवों में पटवारियों की गैरमौजूदगी और तकनीकी पोर्टल के सर्वर डाउन रहने के कारण किसानों का समय पर पंजीयन नहीं हो पा रहा है। सरकारी योजनाओं के बड़े दावों के बीच किसान केंद्रों के चक्कर काटने को विवश हैं।
प्राइवेट डीलर उठा रहे मजबूरी का फायदा
सरकारी रिकॉर्ड और मार्कफेड के विपणन गोदामों में रासायनिक उर्वरक का भरपूर स्टॉक मौजूद होने की बात कही जा रही है। इसके उलट परिवहन और वितरण की अव्यवस्था से गेहूं, चना और मटर उत्पादक किसान खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं। जिन किसानों ने सिकमी पर जमीन लेकर खेती की है, उनके पास ऋण पुस्तिका न होने से उन्हें परमिट नहीं मिल पा रहा। ऐसी लाचारी का लाभ उठाकर निजी खाद विक्रेता सक्रिय हो गए हैं और तय कीमत से अधिक दाम वसूलकर खुलेआम डीएपी बेच रहे हैं।
कर्ज परमिट के बावजूद मनमानी से रोष
किसानों ने रबी बोवनी से पहले सितंबर माह में ही प्राथमिक सहकारी समितियों से ऋण लेकर अग्रिम परमिट हासिल कर लिया था। परमिट व्यवस्था का नियम है कि गोदामों में खाद की खेप पहुंचते ही पहले परमिट धारकों को प्राथमिकता से खाद बांटी जाएगी। पिछले अनुभवों के आधार पर किसानों ने अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है कि डबल लॉक और सेंट्रल लॉक की खाद को नियमों को ताक पर रखकर नकद में बेच दिया जाता है, जिससे पंजीकृत किसान खाली हाथ रह जाते हैं। कुल उपलब्ध खाद में से 80% वितरण सहकारी समितियों और 20% वितरण निजी दुकानों से होना तय है। जिले में इफको, आईपीएल, सरदार, नवरत्ना और कृभको जैसी प्रमुख कंपनियों में से महज 2 कंपनियों की खाद ही आपूर्ति की जा रही है, जबकि खुले बाजार में सभी ब्रांड उपलब्ध हैं। 15 से 20 दिनों में दलहन की बोवनी पूरी होने के बाद गेहूं के लिए मांग और अधिक बढ़ जाएगी।
