जबलपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा और ऊर्जा सचिव के विशेष निर्देश पर ऊर्जा विभाग ने जुलाई 2026 में बिजली कंपनियों के संविदा कर्मियों को स्वीकृत नए समकक्ष नियमित रिक्त पदों पर नवीन नियुक्ति देने की मंजूरी दी थी। इसके तहत पूरी प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2026 तक पूरी की जानी है। मध्य प्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक, यू के पाठक, लक्ष्मण सिंह राजपूत, दिनेश दुबे, एन के यादव, उमाशंकर मेहता, सतीश गुप्ता, सुरेश बाबू खरे, बी एस राठौर, रामेश्वर गांगे, किशोर चौहान, उमाशंकर दुबे, अफसार अहमद, राजेश मिश्रा, गोपाल चौहान, मदन वर्मा, अवनीश तिवारी, सुधीर मिश्रा, दीपक मेमने, विमल महापात्र, अनूप वर्मा, मोहित पटेल, योगेश पटेल, अक्षय श्रीवास्तव और मनोज पाठक ने इस दिशा में अब तक ठोस कदम न उठाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
पूर्व क्षेत्र कंपनी को बनाया था नोडल एजेंसी
ऊर्जा विभाग के फैसले के अनुसार परीक्षा उत्तीर्ण कर वर्षों से सेवाएं दे रहे तकनीकी व गैर-तकनीकी मानव संसाधन को स्थायी संवर्ग में समायोजित किया जाना तय हुआ था। इस पूरी चयन प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से संचालित करने हेतु बाह्य स्रोत एजेंसी का चयन करने का जिम्मा पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को सौंपा गया था। व्यवस्था के तहत एजेंसी तय कर निर्धारित प्रपत्र में संविदा अमले से ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाने थे। इसके साथ ही लिखित या दक्षता परीक्षा की संभावित तारीखों की औपचारिक घोषणा करके पारदर्शी रूपरेखा तैयार की जानी प्रस्तावित थी।
समय-सीमा नजदीक आने से उपजा असंतोष
प्रक्रिया पूरी करने हेतु तय समय सीमा में अब बहुत कम दिन शेष बचे हैं, लेकिन संबंधित एजेंसी के चयन या आवेदन पत्र का प्रारूप सार्वजनिक करने की अधिसूचना तक जारी नहीं हो सकी है। दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी प्रशासनिक सुस्ती कायम रहने से वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के बीच असुरक्षा और मानसिक तनाव का माहौल बन रहा है। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने शासन स्तर पर पुनः संवाद स्थापित करते हुए आग्रह किया है कि शीर्ष नेतृत्व अपने पूर्व आदेशों के पालन में संबंधित प्रबंधन को तत्काल प्रभाव से चयन प्रक्रिया आरंभ करने के सख्त निर्देश प्रेषित करे।
