जबलपुर। स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान के तहत एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी मुख्यालय स्थित हॉस्टल भवन के पास एक दिन, एक घंटा, एक साथ श्रमदान हुआ। इसमें कार्यपालक निदेशक मानव संसाधन एवं प्रशासन फिरोज कुमार मेश्राम, मुख्य महाप्रबंधक प्रवीण कुमार जैन, अतिरिक्त मुख्य महाप्रबंधक अनुराग नायक, प्रशासन महाप्रबंधक नितिन खत्री, चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुनील कुमार वर्मा, डॉ. पंकज वर्मा, केंद्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद खेल सचिव महेश चंद बलोदी तथा अधीक्षण अभियंता सिविल मिलिन्द चौधरी समेत अनेक महिला-पुरुष अभियंताओं व कर्मचारियों ने भाग लिया। बुधवार को आयोजित इस गतिविधि में पूरे अमले ने एक साथ परिसर संवारकर स्वच्छता को कार्यसंस्कृति का मुख्य अंग बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया।
साझा प्रयास से ही स्वच्छ परिवेश संभव होगा
कार्यालय और आसपास के इलाके को साफ-सुथरा रखना केवल चुनिंदा लोगों का काम नहीं है। जब प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक आचरण में स्वच्छता को शामिल करता है, तब बड़े बदलाव की नींव पड़ती है। दफ्तर के वातावरण को रोगमुक्त तथा सुरक्षित बनाए रखना हर कार्मिक के नियमित कर्तव्य से जुड़ा विषय है। संगठित होकर किया गया श्रमदान आपसी सहयोग बढ़ाता है और सबको अपनी नैतिक भूमिका समझाता है। इस तरह के सामूहिक आयोजनों से कार्यस्थल पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। परिसर के कोने-कोने को व्यवस्थित रखने के लिए निरंतर सतर्कता आवश्यक मानी गई। इस दौरान सभी उपस्थित जनों ने अपने आसपास गंदगी न पनपने देने तथा नियमित देखभाल जारी रखने का पक्का इरादा जताया। यह पहल संस्थानों में स्वच्छ वातावरण के प्रति गहरी जवाबदेही तय करती है।
सफाई मित्रों की सेहत व सुरक्षा को प्राथमिकता
ज़मीनी स्तर पर व्यवस्था संभालने वाले सहयोगियों की भलाई को इस आयोजन का केंद्र बनाया गया। अस्पताल की विशेषज्ञ मेडिकल टीम ने सफाई मित्रों का गहन शारीरिक परीक्षण किया। परीक्षण के उपरांत डॉक्टरों ने उन्हें दैनिक कार्यों के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। धूल, कचरे और संक्रमण से बचाव हेतु जीवनशैली से जुड़े जरूरी डॉक्टरी सुझाव दिए गए। प्रबंधन ने कार्यस्थल पर जोखिम घटाने के उद्देश्य से सफाई मित्रों को उच्च गुणवत्ता वाले दस्ताने और अन्य सुरक्षा सामग्री प्रदान की। हाथ और शरीर की सुरक्षा सुनिश्चित होने से फील्ड में कार्य करना कहीं अधिक सुरक्षित हो जाता है। इस कदम से यह स्पष्ट हुआ कि साफ-सफाई के लक्ष्य को पाने के साथ-साथ उन हाथों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है, जो दिन-रात इस काम में जुटे रहते हैं।

