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रेलवे कर्मचारियों के सरकारी आवास का बढ़ा किराया, 1 जुलाई से प्रभावी नई दरें, जानें अब कितना हुआ महंगा

नई दिल्ली. रेलवे के सरकारी आवास की सुविधा ले रहे कर्मचारियों के लिए अब हर महीने जेब पर थोड़ा और भार पड़ेगा। रेलवे बोर्ड ने देशभर में कर्मचारियों को आवंटित सरकारी आवासों के लाइसेंस शुल्क यानी स्टैंडर्ड रेंट में संशोधन कर दिया है।

नई दरें एक जुलाई 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। करीब तीन साल बाद हुए इस संशोधन में क्वार्टर के प्रकार के साथ-साथ उसके प्लिंथ एरिया को आधार बनाया है। रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों के क्वार्टरों के किराये में 10 से 630 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।

इससे पहले जुलाई 2023 में हुआ था संशोधन

ऐसे में सभी श्रेणी के आवासों के लिए अब पहले की तुलना में अधिक किराया देना होगा। रेलवे बोर्ड की ओर से जारी आदेश के अनुसार इससे पहले सरकारी आवासों के लाइसेंस शुल्क में संशोधन एक जुलाई 2023 को किया गया था। इस बार बोर्ड ने अलग-अलग श्रेणी और क्षेत्रफल के हिसाब से नई दरें तय की हैं। सब-स्टैंडर्ड क्वार्टरों पर संशोधित दरें लागू नहीं होंगी। नई व्यवस्था का असर रेलवे कालोनियों में रहने वाले कर्मचारियों के वेतन से होने वाली आवास शुल्क की कटौती में दिखाई देगा।

टाइप-वन से टाइप-फाइव तक बढ़ा किराया

नई दरों के अनुसार टाइप-वन क्वार्टर का मासिक लाइसेंस शुल्क क्षेत्रफल के आधार पर 130 से 220 रुपये तक होगा। 25 वर्ग मीटर तक के आवास का शुल्क 120 से बढ़ाकर 130 रुपये, 25 से 30 वर्ग मीटर वाले आवास का 150 से बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया है। 30 से 35 वर्ग मीटर के लिए 210 रुपये और 35 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले क्वार्टर के लिए 220 रुपये निर्धारित किया है। टाइप-टू क्वार्टरों में 45 वर्ग मीटर तक के आवास का शुल्क 250 से बढ़ाकर 280 रुपये और 45 से 50 वर्ग मीटर तक का शुल्क 280 से बढ़ाकर 310 रुपये किया है।

50 से 55 वर्ग मीटर के लिए 350 रुपये और 55 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल के लिए 380 रुपये देना होगा। वहीं, टाइप-थ्री क्वार्टर में 60 वर्ग मीटर तक के आवास का शुल्क 420 से बढ़ाकर 470 रुपये किया है। 60 से 65 वर्ग मीटर के लिए 530 रुपये, 65 से 70 वर्ग मीटर के लिए 570 रुपये और 70 वर्ग मीटर से अधिक के लिए 610 रुपये मासिक लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है।

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