जबलपुर। आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) के कर्मचारियों ने 1 अक्टूबर को काला दिवस मनाते हुए केंद्र सरकार की निगमीकरण नीति के खिलाफ तीव्र विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने काली पोशाक धारण की और काले बैज लगाकर अपना रोष प्रकट किया। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉयज फेडरेशन के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी अरनब दासगुप्ता ने बताया कि 1 अक्टूबर 2021 को कोरोना महामारी की आड़ में बिना किसी पूर्व संवाद या परामर्श के आयुध कारखानों को निगम में तब्दील करने का एकतरफा आदेश लागू किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी कामगारों की भर्ती सरकारी सेवा नियमों के तहत हुई थी, इसलिए इस निर्णय को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। एक ओर जहां प्रशासन स्तर पर स्थापना का उत्सव मनाया जा रहा था, वहीं मैदानी कामगारों ने इसे पूरी तरह नकारते हुए काला दिवस के रूप में चिह्नित किया।
अधिकारों की रक्षा के लिए साझा संघर्ष जारी
अरनब दासगुप्ता के अनुसार संगठित विरोध के दबाव में शासन को कर्मचारियों से सेवा शर्तों पर विकल्प मांगने के लिए विवश होना पड़ा था। इस प्रक्रिया में देश के 99.9 फीसदी कर्मचारियों ने एकजुट होकर कॉर्पोरेट ढांचे के बजाय स्थायी सरकारी सेवक बने रहने के पक्ष में अपना लिखित विकल्प चुना। कामगारों का कहना है कि वे अपने बुनियादी सेवा अधिकारों, सेवा सुरक्षा और भविष्य के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेंगे। फेडरेशन और उससे संबद्ध श्रमिक संगठन निरंतर इस नीतिगत बदलाव की खामियों को उजागर करते हुए कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं।
आयुध निर्माणी बोर्ड की पुरानी व्यवस्था बहाल हो
आंदोलनरत फेडरेशन और श्रमिक यूनियनों की मुख्य मांग है कि रक्षा उत्पादक कारखानों का पुनर्गठन करके आयुध निर्माणी बोर्ड को उसके मूल सरकारी स्वरूप में पुनः संचालित किया जाए। इसके साथ ही सभी कर्मचारियों के केंद्रीय कर्मचारी दर्जे को आजीवन सुरक्षित रखा जाए। प्रतिनिधियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक आयुध प्रतिष्ठानों को पूर्ववत विभागीय व्यवस्था में वापस नहीं लाया जाता, तब तक यह शांतिपूर्ण और सांकेतिक आंदोलन चरणबद्ध रूप से अनवरत चलता रहेगा।
