जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में सेवाकाल के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों के आश्रित परिजनों ने शासन-प्रशासन के उदासीन रवैये से तंग आकर आत्मदाह और इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। पीड़ितों का कहना है कि 3 वर्षों से पात्रता रखने के बाद भी न तो अनुकंपा नियुक्ति दी गई और न ही पेंशन या ग्रेच्युटी जैसे वैधानिक लाभ मिले। इस संबंध में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और अतिरिक्त मुख्य सचिव (उच्च शिक्षा विभाग) के नाम कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल को ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग उठाई गई है। परिजनों ने सीधे तौर पर कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यदि 8 अक्टूबर तक न्याय नहीं मिला तो वे कुलगुरु कक्ष के बाहर यह आत्मघाती कदम उठाएंगे।
अवैधानिक देरी से गहराया आर्थिक संकट
विश्वविद्यालय में कार्यरत जिन कर्मियों का असमय निधन हुआ था, उनके घरों की माली हालत अत्यंत नाजुक मोड़ पर पहुंच चुकी है। एकल कमाऊ सदस्य खो चुके इन परिवारों के सामने अब बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस, बीमार बुजुर्गों की दवा और दो वक्त की रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नियमानुसार मिलने वाले स्वत्वों के अटकने से यह मानवीय त्रासदी और विकराल हो गई है। आश्रितों ने समय-समय पर लिखित आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर भी गुहार लगाई, परंतु प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे आहत होकर उन्होंने शासन के शीर्ष पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों और उच्चाधिकारियों तक अपनी अंतिम पुकार पहुंचाई है।
अल्टीमेटम के बाद प्रशासन की जवाबदेही होगी
प्रभावितों ने साफ कर दिया है कि तय सीमा बीतने के बाद होने वाले किसी भी अप्रिय घटनाक्रम के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा। कार्यालयों के अनगिनत चक्कर काटने के बाद उपजी हताशा अब आर-पार की लड़ाई का रूप ले चुकी है। निर्धारित मियाद के भीतर संवेदनशीलता दिखाते हुए सेवायोजन और बकाए का निस्तारण नहीं किया गया, तो परिसर में गंभीर विरोध प्रदर्शन देखने को मिलेगा।
