जबलपुर। शासकीय कन्या महाविद्यालय रांझी जबलपुर में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ ने व्यक्तित्व विकास पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। इस महत्वपूर्ण सत्र में संभागीय मार्गदर्शक प्रो. अरुण शुक्ल मुख्य वक्ता रहे, जबकि अध्यक्षता कॉलेज प्राचार्य डॉ. वीणा श्रीवास्तव ने की। पूरे कार्यक्रम का प्रभावी संचालन प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. माधुरी सिंह के हाथों संपन्न हुआ। आयोजन के दौरान मंच और सभागार में डॉ. बिंदु शर्मा, श्रीमती रेणुबाला घई, श्री वीरेंद्र झरिया, श्रीमती कविता धुर्वे, डॉ. स्वीटी यादव और डॉ. दीपेंद्र यादव उपस्थित रहे। इनके साथ जनभागीदारी शिक्षक वर्ग से डॉ. नीलिमा रॉय, डॉ. अंकिता पांडे, डॉ. सपना श्रीवास्तव और कुमारी पूजा सेन ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रो. शुक्ल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिंदगी की हर परीक्षा जीतने के लिए खुद पर भरोसा, लगातार कोशिश और अच्छी सोच बहुत जरूरी है। जब लड़कियां अपने भीतर पक्का इरादा पालती हैं, तब बड़ी से बड़ी रुकावट अपने आप दूर हो जाती है। इंसान की असली पहचान उसके बाहरी रंग-रूप से ज्यादा उसके भीतरी गुणों और आचरण से बनती है। इसलिए हर छात्रा को पहले अपने जीवन का एक पक्का ध्येय चुनना चाहिए और फिर उसे पाने के लिए बिना रुके पूरी ताकत झोंक देनी चाहिए।
नियमित दिनचर्या से हर काम आसान बन जाता है
प्राचार्य डॉ. श्रीवास्तव ने अपने विचार रखते हुए साफ किया कि पढ़ाई के साथ-साथ शरीर और दिमाग दोनों का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है। जब व्यक्ति मानसिक रूप से शांत और शारीरिक रूप से मजबूत रहता है, तभी वह दुनिया का सामना डटकर कर पाता है। उन्होंने छात्राओं को समय की कद्र करने की सीख दी और बताया कि जो व्यक्ति अपने दैनिक कार्यों का सही लेखा-जोखा रखता है, वह कभी पीछे नहीं रहता। अनुशासन ही वह गुण है जो एक साधारण इंसान को समाज में असाधारण मान-सम्मान दिलाता है। सभागार में बैठी सैकड़ों छात्राओं ने पूरे सत्र को बेहद एकाग्रता से सुना और जीवन में आगे बढ़ने के गुर सीखे। उपस्थित प्राध्यापकों ने भी विद्यार्थियों को समझाया कि कॉलेज का यह दौर केवल किताबी ज्ञान बटोरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने पूरे जीवन की मजबूत नींव तैयार करने का सबसे सही अवसर है। छात्राओं ने इस सीख को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प लिया। अंत में प्रकोष्ठ की ओर से सभी अतिथियों, शिक्षकों और सहभागी छात्राओं का आभार व्यक्त करते हुए इस उपयोगी सत्र का औपचारिक समापन किया गया।

