जबलपुर। भारतीय क्रिकेट टीम के 2 बड़े मुकाबलों को लेकर सट्टा बाजार में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। पहला मुकाबला जापान में भारत और पाकिस्तान के बीच 20-20 फॉर्मेट में तय है, जबकि दूसरा एकदिवसीय मैच चंडीगढ़ में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला जाना है। इन मुकाबलों को लेकर सटोरियों द्वारा जापान, दुबई और मुंबई से हाईलाइन लेकर ऑनलाइन दांव लगवाए जा रहे हैं। जबलपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें सुबह से सक्रिय होकर संदिग्ध ठिकानों पर नजर रख रही हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है। सट्टा लगाने वालों के बीच भारतीय टीम के टॉप 5 खिलाड़ियों पर खास नजर है। इनमें वनडे मुकाबले के लिए शुभमन गिल और 20-20 मैच के लिए वैभव सूर्यवंशी पर अलग से दांव लगाए जाने की चर्चा गर्म है। खेल में गेंद दर गेंद होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर सट्टे के भाव लगातार तय किए जा रहे हैं।
सीक्रेट लिंक और कोडवर्ड से चल रहा कारोबार
ऑनलाइन सट्टे का पूरा तंत्र आधुनिक तकनीकों के सहारे संचालित किया जा रहा है। एजेंटों के नाम और पैसों का पूरा हिसाब कंप्यूटर तथा लैपटॉप पर ई-डॉक्यूमेंट्स में दर्ज किया जाता है। सट्टेबाजी के इस नेटवर्क के तार मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चंडीगढ़, दुबई और जापान से सीधे जुड़े हुए हैं। यह खेल किसी सामान्य माध्यम से नहीं, बल्कि एक विशेष ऐप के जरिए खेला जा रहा है। यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर सीधे उपलब्ध नहीं रहता है। बुकिंग करने वाले बुकी पहले दांव लगाने वाले ग्राहक की पूरी पहचान और विश्वसनीयता की पुष्टि करते हैं। भरोसा पक्का होने के बाद ही ग्राहक को एक निजी लिंक भेजा जाता है। इसी लिंक के माध्यम से ऐप डाउनलोड करवाकर ऑनलाइन खाईबाजी कराई जाती है।
शहर से देहात तक फैले सट्टे के ठिकाने
सटोरियों ने अपने कारोबार को फैलाने के लिए शहर के भीतर और आसपास के कस्बों में कई ठिकाने चिन्हित कर रखे हैं। गोरखपुर, सदर, ओमती, गढ़ा, रांझी, अधारताल, लार्डगंज, रानीताल, विजय नगर और हनुमानताल जैसे प्रमुख शहरी इलाके इस गतिविधि के लिए लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। इसके अलावा सिहोरा, पाटन, बरेला, शहपुरा, बेलखेड़ा, मझौली और पनागर के इलाकों में भी नेटवर्क की मौजूदगी की जानकारी सामने आती रही है। पुलिस की संभावित छापेमारी से बचने के लिए सटोरिए भीड़भाड़ वाली बस्तियों के बजाय शहर के पॉश इलाकों, दूरदराज बने फार्महाउसों और होटलों को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं। सुरक्षित माहौल मिलने पर ही वहां से पूरा सिंडीकेट संचालित किया जाता है।
पड़ोसी जिलों तक फैला खाईबाजों का नेटवर्क
बीते वर्षों में हुई पुलिस कार्रवाइयों और जांच से यह साफ हो चुका है कि स्थानीय सटोरियों ने आसपास के कई जिलों में अपना मजबूत नेटवर्क खड़ा किया है। कटनी, दमोह, मंडला और नरसिंहपुर तक फैले इस तंत्र में बड़े बुकी सीधे चुनिंदा ग्राहकों से संपर्क साधते हैं। महत्वपूर्ण क्रिकेट मैचों के अलावा अन्य अंतरराष्ट्रीय खेलों के दौरान भी रेट सहित तमाम जानकारियां सीधे ग्राहकों तक पहुंचाई जाती हैं। इस बार भी पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए सटोरियों ने पहले से ही गोपनीय और सुरक्षित स्थान तय कर लिए हैं। क्राइम ब्रांच की टीमें चिन्हित नामचीन सटोरियों की गतिविधियों, उनके कॉल डिटेल और आवाजाही पर कड़ी निगरानी रख रही हैं।
