कर्मचारी संघ के संघ अध्यक्ष संजय यादव ने बताया कि पदोन्नति के 70 पदों को सरकार ने समाप्त कर दिया था, जबकि उक्त पदों की विश्वविद्यालय को आवश्यकता है। वहीं उक्त पदों के अचानक समाप्त किए जाने से उभरी तकनीकी अड़चनों के कारण सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों की पेंशन भुगतान में अनेक परेशानियां आ रही हैं। इस मामले में अगर विश्वविद्यालय प्रशासन ने मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा होता तो, ऐसी परिस्थितियों से कर्मचारियों को नहीं गुजरना पड़ता। संघ पदाधिकारियों ने कुलगुरु की प्रशासनिक दक्षता पर सवाल खड़े करते हुए बताया कि जब से उन्होने ने आरडीयू में पदभार संभाला है, दिनों दिन हालात खराब होते जा रहे हैं। परीक्षाएं और उनके परिणाम समय पर नहीं आ रहे हैं। शैक्षणिक कलैंडर के लिहाज से आरडीयू करीब छह से आठ माह पीछे चल रहा है। यह देरी छात्रों के कई अवसरों को समाप्त कर रही है। कर्मचारी संघ तो अब कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा की योग्यता पर भी सवाल उठा रहा है। इस अवसर पर संघ सचिव अंकित श्रीवास, पूर्व संघ अध्यक्ष बैसाखू, रामसजीवन सोंधिया आदि मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि 6 अगस्त से लगातार कर्मचारियों का क्रमिक अनशन चल रहा है। कर्मचारी अपने आंदोलन को व्यापक रुप देते हुए जनप्रतिनिधियों के निवास पहुंचने का निर्णय लिया है।