कृषि उपज मंडी में वाहनों के प्रवेश पर पर्ची दी जाती है। इस पर्ची की आड़ में फसल के ढेर के हिसाब से दस रूपए प्रति ढेर राशि ली जाती है। इसमें किसान का नाम, जगह और मोबाइल नंबर लिखा जा रहा है। पर्ची में शुल्क का भी कॉलम है, जिसमें सिर्फ शून्य लिखा हुआ है।
कम पढ़े लिखे का उठा रहे फायदा
मंडी के प्रवेशद्वार पर बैठे मंडी कर्मचारी किसानों के कम पढ़े लिखे होने का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। दस रूपए वसूलने के बाद उन्हें बिना शुल्क की पर्ची थमाई जा रही है। मौके पर किसान से सिर्फ अनाज का वजन पूछा जाता है और उसमें ढेर के हिसाब से प्रवेश शुल्क जोड़ दिया जा रहा है।
रोजाना एक हजार वाहनों से वसूली!
मंडी के प्रवेशद्वार से रोजाना करीब एक से डेढ़ हजार छोटे-बड़े वाहन प्रवेश कर रहे हैं। इन वाहनों में सब्जी, अनाज, टमाटर, फल आदि रहते हैं। इनके वजन के हिसाब मौजूद कर्मचारी पर्ची काटकर वसूली कर रहा है। जानकार कहते हैं कि सीजन के समय इन वाहनों की संख्या दो गुनी हो जाती है। करीब दो से ढाई हजार वाहन रोजाना आते हैं।
जेब में जा रहा सरकारी राजस्व
पर्ची में बिना शुल्क दिखाने से जाहिर है कि किसानों के वाहनों से वसूली किए जाने की राशि कर्मचारियों की जेब में जा रही है। दस रूपए के हिसाब से एक हजार वाहनों की वसूली दस हजार रूपए प्रतिदिन होती है। इससे एक महीने में यह आंकड़ा तीन लाख रूपए पहुंच जाता है। यदि साल का देखा जाए तो इस छोटी सी राशि से कर्मचारी 36 लाख रूपए साल भर में अपनी पॉकेट में भरकर सरकार को चूना लगा रहे हैं।
ये थी हकीकत
कृषि उपज मंडी के गेट नंबर 1 पर बने चैक प्वाइंट पर कार्यालय है। इस कार्यालय में खिड़की पर किसानों की लाइन लग रही है। किसान गेट पर अपना वाहन खड़ा करके प्रवेश पर्ची कटवाने उतरते हैं। खिड़की पर किसान का नाम, पता और फसल का वजन पूछकर शुल्क बता दिया जा रहा है और शुल्क लेकर उन्हें खाली पर्ची पकड़ाई जा रही है।
(जैसा कि वीडियो में रिकार्ड हुआ है।)
कहते हैं किसान
क्यों भाई मंडी में अनाज लाने पर पैसा लगता है ?
हां, लगता है।
कितना लगता है ?
आप गेट पर पूछ लो।
आप तो माल लाए होंगे, कितना लगा ?
दस रूपए।
दस रूपए में फसल अंदर ला सकते हैं ?
नहीं, हर ढेर का दस रूपए लगाया जाता है।
- मैंने अभी ज्वाइन किया है। मंडी प्रवेश शुल्क की जानकारी लगी थी। मैं इस मामले को समझ रहा हूं ताकि कार्रवाई की जा सके।
समीर दास, सचिव, कृषि उपज मंडी