khabar abhi tak

सस्पेंड CSP नेहा पच्चीसिया सहआरोपी के साथ पत्नी की तरह रहती थी, शासकीय अधिवक्ता ने HC में किया दावा, पहले एक दूसरे को पहचानने से इंकार कर चुके है

 

जबलपुर/कटनी। एमपी हाईकोर्ट में कटनी के चर्चित जमीन सौदे, कथित फर्जीवाड़े और पद के दुरुपयोग के मामले में निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया की याचिका पर आज सुनवाई हुई। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने FIR रद्द करने और दंडात्मक कार्रवाई से राहत देने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

                             हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि सह-आरोपी क्षितिज राज बारापात्रे व नेहा पच्चीसिया एक-दूसरे को जानते थे और एक ही घर में पति-पत्नी की तरह रहते थे। अभियोजन पक्ष ने जांच के दौरान दर्ज पुलिसकर्मियों के बयानों का हवाला देते हुए यह दावा कोर्ट में रखा। सरकारी वकील ने बताया कि नेहा पच्चीसिया के अधीनस्थ आरक्षक मोंटू को उनके निवास पर राशन और घरेलू सामान लाने के लिए भेजा जाता था। अभियोजन के मुताबिक, इन सामान का भुगतान क्षितिज राज बारापात्रे करते थे। अभियोजन ने कोर्ट को बताया कि जिला अदालत में अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने एक-दूसरे को पहचानने से इनकार किया था। नेहा पच्चीसिया की ओर से यह भी दलील दी गई थी कि उनका विवाह टूट चुका है और दो छोटी बच्चियों की जिम्मेदारी उनके ऊपर है। जिला कोर्ट ने दोनों के बीच बताए गए संबंधों और मामले के आरोपों को देखते हुए अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी थी।

याचिकाकर्ता ने कहा- FIR में सीधी भूमिका नहीं-

नेहा पच्चीसिया की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि एफआईआर में उनकी कोई स्पष्ट या सीधी भूमिका नहीं है। उनके वकील ने उन्हें गलत तरीके से मामले में फंसाए जाने की बात कही। राज्य सरकार ने अंतरिम राहत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि जेल में बंद हत्या के एक आरोपी को फायदा पहुंचाने के लिए चालान पेश करने में जानबूझकर देरी की गई। सरकार की ओर से पीडि़त परिवार को डराकर कीमती जमीन हड़पने के भी आरोप लगाए गए।

लुक आउट सर्कुलर जारी होने की जानकारी दी-

सरकार ने कोर्ट को बताया कि आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद से नेहा पच्चीसिया फरार हैं। उनके विदेश जाने की आशंका के चलते लुक आउट सर्कुलर जारी किए जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई। अभियोजन ने इसी आधार पर न्यायिक राहत का विरोध किया।

वकील ने ट्रक से कुचलने की कोशिश का आरोप लगाया-

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवनीश तिवारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की पैरवी करने के कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। तिवारी ने दावा किया कि 11 सितंबर के आसपास ट्रक चढ़ाकर उनकी हत्या की कोशिश की गई। कोर्ट ने इस मामले में उन्हें पहले नियमानुसार वकालतनामा पेश करने को कहा।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित-

हाईकोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत के फैसले के बाद ही एफआईआर रद्द करने और दंडात्मक कार्रवाई से राहत की मांग पर स्थिति साफ होगी।


Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak