राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह का बलिदान दिवस: जबलपुर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि
जबलपुर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर पहुंचकर 1857 की क्रांति के अमर बलिदानी राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। विमानतल पर आत्मीय स्वागत के पश्चात मुख्यमंत्री ने एल्गिन अस्पताल के सामने स्थित वीरगति स्थल पर दोनों महानायकों की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किए। इसके बाद वे मालगोदाम स्थित वीर मंच पहुंचे और जनसमुदाय को संबोधित किया। इस गरिमामय अवसर पर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सांसद आशीष दुबे, राज्यसभा सदस्य सुमित्रा वाल्मीकि, विधायक नीरज सिंह, अशोक रोहाणी, इंदू तिवारी, अजय विश्नोई, नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, जेडीए अध्यक्ष संदीप जैन और निगमाध्यक्ष रिंकू विज सहित अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे।
गोंड राजवंश का त्याग सदैव स्मरणीय रहेगा
मुख्यमंत्री ने मालगोदाम के वीर मंच से सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह का संबंध गढ़ा-मंडला के ऐतिहासिक गोंड राजवंश से था। यह गौरवशाली राजवंश सदियों से मातृभूमि की रक्षा और अप्रतिम त्याग के लिए जाना जाता है। ब्रिटिश हुकूमत के क्रूर दौर में इन दोनों वीरों ने सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। राजा शंकर शाह ने अपनी कविताओं और ओजस्वी गीतों के माध्यम से जनमानस में स्वाधीनता की अलख जगाई थी।
तोप के मुंह से बंधकर पाई शहादत
ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों ने छलपूर्वक रियासतों को हड़पने की नीति अपनाई थी। दोनों महानायकों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खुलकर बगावत की। परिणाम स्वरूप 14 सितंबर 1857 को अंग्रेजों ने उन्हें बंदी बनाकर उन पर देशद्रोह का झूठा अभियोग चलाया और मृत्युदंड सुनाया। इसके बाद 18 सितंबर 1857 को जबलपुर में दोनों वीर सेनानियों को तोप के मुंह से बांधकर उड़ा दिया गया। इन वीरों ने अंग्रेजों के समक्ष झुकने अथवा क्षमा मांगने के बजाय हंसते-हंसते मातृभूमि पर प्राण न्योछावर करना स्वीकार किया।
संस्कृति और आस्था पर सवाल उठाना अनुचित
मुख्यमंत्री ने संबोधन में स्पष्ट किया कि देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर क्रांतिकारियों की स्मृति हर नागरिक में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाती है। देश पर उनका यह कर्ज सदैव बना रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित दीपोत्सव को लेकर उठ रहे सवालों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में दीप प्रज्वलन अत्यंत शुभ और सूर्य आधारित वैदिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों पर संकीर्ण सोच और वोटों की राजनीति के तहत सवाल उठाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने बलिदान स्थल के भव्य सौंदर्यीकरण कार्य के लिए नगर निगम प्रशासन की सराहना भी की।
