पदोन्नति का बदला सिर्फ नाम, जिम्मेदारियां अब भी पुरानी
जबलपुर। सरकारी विभागों में लंबे समय बाद पदोन्नति का रास्ता खुला, लेकिन यह बदलाव मैदानी स्तर के बजाय केवल कागजों में सिमटकर रह गया। पुलिस, लोक निर्माण विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग में व्यापक स्तर पर पदोन्नति आदेश तो जारी कर दिए गए, किंतु संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को नवीन पदभार और आधिकारिक दायित्व नहीं सौंपे गए। पदनाम बदल जाने के बावजूद कार्मिक पूर्ववत पुरानी सीटों पर ही काम करने को विवश हैं। विभागों द्वारा पदोन्नति देकर नई पदस्थापना न किए जाने से मैदानी तंत्र में गतिरोध बन गया है। सिपाही, हवलदार, एएसआई, एसआई, इंस्पेक्टर, डीएसपी, सहायक यंत्री, कार्यपालन यंत्री, सब इंजीनियर, एसडीओ, व्याख्याता, हाई स्कूल प्राचार्य और हायर सेकेंडरी स्कूल प्राचार्य स्तर तक के कर्मियों में इस विसंगति को लेकर गहरा असंतोष पनप रहा है।
वर्दी पर चमके सितारे, अधिकार पुराने ढर्रे पर
पुलिस विभाग में मैदानी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से सिपाही से हवलदार, हवलदार से एएसआई, एएसआई से एसआई और एसआई से इंस्पेक्टर स्तर तक पदोन्नतियां की गईं। इंस्पेक्टर से डीएसपी बने कई अधिकारियों की वर्दी पर नए पद के सितारे तो सज गए, किंतु उन्हें उस पद का प्रभार और अधिकार नहीं सौंपे गए। यद्यपि टीआई जैसे कुछ अहम पदों पर पदोन्नत कार्मिकों ने नई जगह आमद दर्ज कराई है, पर डीएसपी स्तर के अधिकांश अधिकारी पुराने कार्य तक ही सीमित हैं।
इंजीनियर और प्राचार्य बने, पदस्थापना आदेश अब तक लापता
स्कूल शिक्षा विभाग में व्याख्याताओं को हाई स्कूल प्राचार्य और हाई स्कूल प्राचार्यों को हायर सेकेंडरी स्कूल प्राचार्य बनाया गया, मगर नया कार्य व्यवहार शुरू नहीं हो सका। इसी प्रकार लोक निर्माण विभाग में सहायक यंत्रियों को कार्यपालन यंत्री तथा सब इंजीनियरों को अनुविभागीय अधिकारी या सहायक यंत्री बनाया गया, फिर भी तकनीकी अमले को नई परियोजनाओं के बजाय पूर्ववत जिम्मेदारियों में उलझा कर रखा गया है।
