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डिजिटल मंचों पर राष्ट्रभाषा की धमक से बढ़ेगा स्वाभिमान



जबलपुर। डीएन जैन महाविद्यालय में आज हिंदी पखवाड़े के तहत विशेष कार्यशाला संपन्न हुई। इस आयोजन में मुख्य वक्ता शासकीय महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. अरुण शुक्ल, विषय विशेषज्ञ जी.एस. कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शिवकुमार व्यास और अध्यक्ष के रूप में संस्था प्रमुख डॉ. तरुण कुमार बाजपेयी मंचासीन रहे। मंच संचालन वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. एच.एन. मिश्रा ने संभाला एवं डॉ. शैलेश जैन ने आभार प्रकट किया। संगोष्ठी में कला विभाग प्रमुख डॉ. शिखा ताम्रकार, प्राध्यापक कु. राधा मौर्य, अनुराग नामदेव, अमित कश्यप, कुमारी रूपा कहार, सत्येंद्र शुक्ला, शिक्षक गण और सैकड़ों विद्यार्थी उपस्थित रहे। वक्ताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में छिपी संभावनाओं, भाषाई अस्मिता, सनातन संस्कृति और आजीविका के आधुनिक आयामों पर अपना गहन चिंतन साझा किया। सत्र के आरंभ में मुख्य वक्ता ने स्पष्ट किया कि किसी भी मुल्क का वास्तविक विकास उसकी अपनी जुबान की संपन्नता पर टिका होता है। नई शिक्षण व्यवस्था ने मातृभाषा के दायरे को केवल साहित्य तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक कमाई का सशक्त जरिया बना दिया है। यदि आज की पीढ़ी भाषाई समझ के संग डिजिटल माध्यमों और संवाद कला का सही तालमेल बिठा ले, तो आत्मनिर्भरता की राह बेहद सुगम हो जाती है। अनुवाद, कंटेंट राइटिंग और वॉइस ओवर जैसे नए काम युवाओं की आर्थिक स्थिति को संवारने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

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डिजिटल युग में मातृभाषा दिलाएगी स्वाभिमान और कामयाबी

​अकादमिक मंथन को आगे बढ़ाते हुए आमंत्रित विशेषज्ञ ने रेखांकित किया कि स्वभाषा को अपनाना आत्मसम्मान और गौरव की पहचान है। यह प्राचीन विरासतों को सहेजने वाली एक जीवंत अभिव्यक्ति है। आधुनिक दौर की ज़रूरतों के मुताबिक अब यह सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं रही, बल्कि ई-कॉमर्स, गेमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विज्ञापनों के बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना चुकी है। हर बदलते दौर के साथ कामकाज के असीमित रास्ते खुलते जा रहे हैं।अध्यक्षीय उद्बोधन में रेखांकित किया गया कि हमारी बोलचाल सनातन मूल्यों की संवाहक है। सरकारी दफ्तरों, अदालती कार्यवाहियों, टीवी-सिनेमा, इंटरनेट पोर्टल्स और सूचना प्रौद्योगिकी में स्थानीय भाषा की मांग तेजी से बढ़ी है। अब यह जनमानस को नौकरी और व्यवसाय देने वाली एक व्यावहारिक शक्ति बन चुकी है। समारोह के समापन पर उपस्थित शिक्षकों और शिक्षार्थियों ने संकल्प लिया कि वे अपनी रोज़मर्रा की दिनचर्या तथा कार्यस्थल पर राष्ट्रभाषा का आदर करेंगे और इसके माध्यम से नई संभावनाओं को तलाशेंगे। पूरा परिसर दिनभर ज्ञानवर्धक संवाद और वैचारिक चेतना से गुंजायमान रहा।

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