जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने इंदौर शहर में अति उच्च दाब विद्युत लाइनों के प्रतिबंधित कॉरिडोर में अवैध निर्माणों के खतरों से आगाह करने व्यापक जन-जागरूकता मुहिम शुरू की है। मुख्य अभियंता डी.के. अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं अतिरिक्त मुख्य अभियंता नीलम खन्ना की पहल पर घनी बस्ती खजराना में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान क्षेत्रीय पार्षद उस्मान पटेल ने खुद आगे आकर मोर्चा संभाला और रहवासियों को हादसों के प्रति आगाह किया। मौके पर मौजूद कार्यपालन अभियंता नम्रता जैन और सहायक अभियंता रवींद्र पटेल ने नागरिकों से अनिवार्य सुरक्षा दूरी बरतने तथा तकनीकी नियमों का पालन करने की समझाइश दी। विभाग द्वारा चलाई जा रही इस विशेष मुहिम को स्थानीय रहवासियों और जनप्रतिनिधियों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।
खजराना में 998 मकानों को पहले ही नोटिस
अत्यधिक आबादी वाले खजराना क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति सुरक्षा के लिहाज से बेहद नाजुक पाई गई है। यहाँ 220 केवी क्षमता की साउथ ज़ोन–जैतपुरा, इंदौर–मांगलिया, इंदौर–देवास, बिचोली–देवास एवं 132 केवी की साउथ ज़ोन–महालक्ष्मी–मांगलिया पारेषण लाइनें गुजरी हैं। इन अति उच्च दाब ग्रिड लाइनों के प्रतिबंधित दायरे में 998 मकान बने हैं, जिन्हें प्रशासन पूर्व में चेतावनी पत्र थमा चुका है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियमानुसार 132 केवी लाइनों के लिए 27 मीटर तथा 220 केवी नेटवर्क हेतु 35 मीटर राइट ऑफ वे गलियारा पूरी तरह खाली रहना अनिवार्य है।
गर्मी में तारों का फैलाव बढ़ा देता है जोखिम
अधिक तापमान और प्रचंड गर्मी के दौर में बिजली तारों में फैलाव आने से वे नीचे झुक जाते हैं, जिसे तकनीकी भाषा में सैग कहते हैं। वहीं आंधी और तेज हवा चलने पर ये तार क्षैतिज दिशा में झूलते हैं, जिसे कंडक्टर स्विंग कहा जाता है। ट्रांसमिशन गलियारे में अनधिकृत निर्माण सामान्य घरेलू 230 वोल्ट बिजली के मुकाबले 600 से 900 गुना अधिक घातक साबित होते हैं। जरा सी चूक से न केवल जानमाल का भारी नुकसान हो सकता है, बल्कि ग्रिड ट्रिप होने से समूचे शहर की विद्युत आपूर्ति कई दिनों तक ठप पड़ सकती है। विभाग ने सभी लोगों से अपनी सुरक्षा खातिर नियमों के पालन की अपील की है।

