जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ के न्यायाधीश जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह 17 सितंबर 2026 को अपने पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके सम्मान में गुरुवार दोपहर 3:30 बजे मुख्य अदालत में फुल कोर्ट फेयरवेल का आयोजन रखा गया है, जिसमें सभी साथी न्यायमूर्ति, वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायिक अधिकारी मौजूद रहेंगे। इनके कार्यमुक्त होने के साथ ही प्रदेश की उच्च अदालत में कार्यशील जजों की कुल संख्या घटकर मात्र 38 रह जाएगी, जिससे स्वीकृत 53 पदों के मुकाबले 15 पद पूरी तरह खाली हो जाएंगे। दूसरी तरफ अदालत में 4.75 लाख से अधिक पुराने मुकदमे फैसले की राह देख रहे हैं, जिसका सीधा असर अब आम जनता के लंबित प्रकरणों की सुनवाई और न्याय मिलने की रफ्तार पर पड़ना तय माना जा रहा है।
तीन दशक लंबे न्यायिक सफर का शानदार पड़ाव
जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह का विधिक सफर बेहद विस्तृत और प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने 31 मई 1990 को अधीनस्थ न्यायपालिका में सिविल जज के पद पर चयन के साथ अपने दायित्वों की शुरुआत की थी। जिला न्यायालयों के विभिन्न संवर्गों में 33 साल तक निष्पक्ष सेवाएं देने के उपरांत 1 मई 2023 को उन्होंने उच्च न्यायालय के जज के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की थी। अपने इस कार्यकाल में उन्होंने दीवानी, आपराधिक और संवैधानिक विषयों से जुड़े अनेक पेचीदा मुकदमों में अहम कानूनी व्यवस्थाएं प्रतिपादित की हैं।
अदालतों में मुकदमों के त्वरित निराकरण की चुनौती
उच्च न्यायपालिका में जजों की अनुपलब्धता का दायरा 28 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इतने बड़े पैमाने पर बेंचों की कमी से प्रकरणों की दैनिक सूची पर काम का बोझ बढ़ जाएगा। नए केसों के लगातार दर्ज होने और निस्तारण के अनुपात में अंतर आने की आशंका व्यक्त की जा रही है। संस्थागत ढांचा कमजोर होने की स्थिति में विधिक समुदाय के बीच यह चर्चा तेज है कि रिक्त कुर्सियों को शीघ्र भरने के लिए कॉलेजियम स्तर पर त्वरित सिफारिशें भेजी जाएं, ताकि वादकारियों को समय पर राहत प्राप्त हो सके।
