जबलपुर। जिले में बरगी बांध से हाल ही में छोड़े गए पानी ने बड़ा नुकसान किया है। बांध के 17 गेट एक साथ खुलने से निकली अथाह जलराशि के वेग ने सामने बने करीब 4 दशक पुराने छोटे पुल की चारदीवारी को पूरी तरह तोड़ दिया है। दीवार बहकर सड़क पर आ गई जिससे दोनों तरफ के 4 पहिया वाहनों का आवागमन पूर्णतः थम गया है। दूसरी तरफ जबलपुर में मौसम विभाग ने 1 जून से शुरू हुए मानसूनी सीजन के 30 सितंबर को खत्म होने की जानकारी दी है। इस साल जिले में निर्धारित 48 इंच औसत के मुकाबले अब तक महज 845.2 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज हुई है। पिछले साल इस समय तक 1180.6 मिलीमीटर पानी गिर चुका था। दक्षिण पश्चिम मानसून राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात से वापस जा चुका है और 1 सप्ताह में मध्य प्रदेश से भी विदा हो जाएगा। अब आगे होने वाली बारिश विंटर सीजन के आंकड़ों में जुड़ेगी।
स्थानीय लोगों ने उठाया रखरखाव पर सवाल
पुल की दुर्दशा को लेकर क्षेत्रीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उनका स्पष्ट मानना है कि समय पर विभागीय स्तर पर उचित मरम्मत न होने के कारण ही आज यह गंभीर नौबत आई है। यह ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण और इकलौता साधन है जिस पर सैकड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी निर्भर करती है। लंबे समय से इस ढांचे की अनदेखी की जा रही थी। जलस्तर कम होने के बाद जब लोग वहां पहुंचे तो यह खौफनाक नजारा देखकर हैरान रह गए। यदि यह मुख्य ढांचा पूरी तरह से गिर जाता है, तो लोगों के सामने आवश्यक कार्यों के लिए परिवहन का एक बहुत बड़ा और विकराल संकट खड़ा हो जाएगा।
नया मानसूनी सिस्टम नहीं, बारिश की उम्मीद खत्म
मौसम विशेषज्ञों के पास उपलब्ध डेटा के मुताबिक वर्तमान में जिले के ऊपर आसमान पूरी तरह से साफ हो चुका है और आसपास के वायुमंडल में कोई भी नया दबाव क्षेत्र या सिस्टम फिलहाल सक्रिय नजर नहीं आ रहा है। आधिकारिक कैलेंडर के पन्ने पलटने पर पता चलता है कि अब इस अवधि के खत्म होने में मात्र 2 दिन का ही समय शेष बचा है। ऐसे में यह पूरी तरह से तय और स्पष्ट हो चुका है कि इस वर्ष पानी का अंतिम और क्लोजिंग आंकड़ा 33.27 इंच पर ही स्थिर रहेगा, जो कि सामान्य से काफी कम है। पूरे देश को 80 फीसदी जल से तृप्त करने वाले इस महत्वपूर्ण सीजन की उल्टी गिनती अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
पुल का सुधार न होने पर बढ़ेगा संकट
क्षतिग्रस्त हिस्से के कारण मौके पर लगातार एक बड़ा हादसा होने का खतरा मंडरा रहा है। सुरक्षा दीवारों के अभाव में लोग अपनी जान जोखिम में डालकर पैदल या छोटे वाहनों से उस पार जाने का प्रयास कर सकते हैं, जो किसी भी पल जानलेवा साबित हो सकता है। यह स्थिति तब और भयानक हो जाती है जब रात के अंधेरे में कोई अनजान वाहन चालक इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करे। अब संबंधित निर्माण विभाग के अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचकर नुकसान का भौतिक सत्यापन और बारीकी से आंकलन करना होगा। इसके साथ ही फंसे हुए यातायात को सुरक्षित रूप से बहाल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जैसे ठोस एवं त्वरित कदम तुरंत उठाने होंगे।
