जबलपुर। शहर के खजरी खिरिया क्षेत्र में बिजली अमले की मनमानी से कारोबारी हलकान हैं। रविवार को मेंटेनेंस का हवाला देकर आपूर्ति बंद रखी गई, जबकि 21 सितंबर यानी कल सोमवार को भी कटौती का नया शेड्यूल जारी कर दिया गया है। 7 दिनों में कई मर्तबा बिना पूर्व सूचना के विद्युत प्रवाह रोका जा रहा है। फील्ड पर मौजूद लाइनमैन मोहन ठाकुर और अन्य सहयोगी स्टाफ शिकायतों को अनसुना कर टालमटोल कर रहे हैं। शर्मनाक है कि अधिकारियों को यह भी पता नहीं होता कि उनके इलाके की बिजली गोल है और क्यों गोल है। वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों तक गुहार लगाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। कमर्शियल क्षेत्र होने के कारण भारी टैक्स और बिल चुकाने के बावजूद नियमित ऊर्जा नहीं मिल रही। खून के आंसू रोने को मजबूर दुकानदार अब अपने व्यवसाय बंद करने की कगार पर पहुंच गए हैं।
मेंटेनेंस के बहाने जारी हुआ लंबा कटौती शेड्यूल
ऊर्जा आपूर्ति कंपनी के तकनीकी दस्ते ने मरम्मत कार्य का हवाला देकर कार्यदिवसों में भी सप्लाई बंद करने की रूपरेखा तैयार कर दी है। रविवार के अवकाश के दिन पूरा बाजार ठप रखने के बाद अब कार्यसप्ताह के पहले दिन भी कामकाज पर ताला लगाने का बंदोबस्त कर दिया गया है। पहले से कोई स्पष्ट समय सीमा निर्धारित न होने के कारण गोदामों और दुकानों में माल का उठाव नहीं हो पा रहा है।
बैकअप के भारी ईंधन खर्च से टूटा बजट
आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यापारियों को घंटों तक लगातार महंगे ईंधन पर आश्रित रहना पड़ रहा है। लगातार मशीनें चलाने के कारण रोजाना की परिचालन लागत बजट से कई गुना बाहर निकल चुकी है। छोटे दुकानदारों के पास वैकल्पिक ऊर्जा के साधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनकी दैनिक आमदनी शून्य पर पहुंच गई है। लगातार नुकसान झेलते हुए शोरूम और वर्कशॉप का किराया निकालना भी अब दूभर हो रहा है।
शिकायत लेकर पहुंचे उपभोक्ताओं से पल्ला झाड़ा
स्थानीय तकनीकी अमला उपभोक्ताओं की परेशानियों का हल खोजने के बजाय उल्टे नियम और शर्तें गिनाने लगता है। सबस्टेशन से लेकर फील्ड कर्मियों के फोन अक्सर व्यस्त मिलते हैं या फिर उन्हें सीधे बंद कर दिया जाता है। जब प्रतिनिधिमंडल अपनी पीड़ा लेकर पहुंचता है तो उसे फॉल्ट खोजने और तकनीकी खामियों की लंबी सूची थमाकर बिना किसी समाधान के वापस लौटा दिया जाता है।
कमर्शियल हब में निवेश कर पछता रहे कारोबारी
अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर इस क्षेत्र में नया उद्यम स्थापित करने वाले उद्यमियों को अब अपने फैसले पर गहरा पछतावा हो रहा है। लगातार अंधेरा रहने के कारण कारीगर और मजदूर खाली बैठकर दिन गुजार रहे हैं, जिससे समय पर ऑर्डर पूरे नहीं हो पा रहे। यदि यही प्रशासनिक रवैया जारी रहा तो क्षेत्र से थोक और खुदरा कारोबारियों का पलायन तय है, जिसकी सीधी जवाबदेही लापरवाह बिजली अमले पर होगी।
अमले से जवाब तलब किया जाएगा: सीई गिरिया
यदि किसी एक इलाके में बार-बार लाइट गोल की जा रही है और मेंटेनेंस के लिए की जा रही, तो यह गंभीर है। सवाल ये है कि आखिर इतनी बिजली कटौती की जरूरत क्यों पड़ रही है। संबंधित क्षेत्र के जो अधिकारी हैं उनसे जल्दी जवाब तलब किया जाएगा, व्यापारियों की राहत के लिए इंतजाम किए जाएंगे
एसके गिरिया, चीफ इंजीनियर, जबलपुर
