मुंबई. भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के पहले ही कारोबारी सत्र में भारी बिकवाली का तूफान देखने को मिला, जिसने घरेलू निवेशकों की कमर तोड़ दी। शुरुआती हरे निशान के बाद बाजार में चौतरफा बिकवाली हावी हो गई और दिन के पीक से सेंसेक्स करीब 1300 अंक तक फिसल गया। इस भयानक गिरावट से महज 330 मिनट के भीतर निवेशकों के 9.13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए। यानी बाजार में प्रति मिनट निवेशकों को औसतन 2,727 करोड़ का तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
दिन के ऊपरी स्तर से औंधे मुंह गिरे सेंसेक्स और निफ्टी
कारोबार के शुरुआती 45 मिनट में बाजार मजबूती के साथ हरे निशान में था। इस दौरान सेंसेक्स 75,369.63 के स्तर तक पहुंचा, जबकि निफ्टी ने 23,592.85 का इंट्रा-डे हाई बनाया। हालांकि, सुबह 10 बजे के बाद जैसे ही वैश्विक तनाव और आर्थिक दबाव के संकेत मिले, बाजार ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगा। सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 1,289.16 अंक टूटकर 74,080.47 के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी दिन के पीक से 417.85 अंक फिसलकर 23,175 के स्तर तक लुढ़क गया।
मार्केट कैप में ?9.13 लाख करोड़ की सीधी चपत
शेयर बाजार में मचे इस कोहराम का सीधा असर बीएसई के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पर पड़ा। कारोबारी सत्र की शुरुआत में बीएसई का कुल मार्केट कैप 4,81,92,523.08 करोड़ रुपये था, जो दिन के निचले स्तर पर गिरकर 4,72,79,214.41 करोड़ रुपये पर आ गया। इस तरह निवेशकों की संपत्ति से देखते ही देखते 9,13,308.67 करोड़ का सफाया हो गया। अपने लाइफटाइम हाई से सेंसेक्स अब 12,000 से अधिक अंक नीचे फिसल चुका है।
कच्चे तेल में भारी उबाल और मिडिल ईस्ट का तनाव
बाजार में आई इस सुनामी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सबसे बड़ा कारण रहीं। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमलों से सप्लाई बाधित होने का खतरा गहरा गया है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड 2 फीसदी उछलकर 108 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 104 डॉलर के करीब पहुंच गया। तेल के महंगे होने से महंगाई का दबाव दोबारा बढऩे का खतरा पैदा हो गया है।
यूएस बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की सख्ती
अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 2023 के बाद पहली बार 5 प्रतिशत के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है। बॉन्ड यील्ड बढऩे से वैश्विक फंड्स शेयर बाजार से पैसा निकालकर डेट मार्केट की ओर लगाने लगे हैं। वहीं, अमेरिका में महंगाई दर लक्ष्य से ऊपर रहने के कारण यह आशंका और गहरी हो गई है कि यूएस फेडरल रिजर्व आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ा सकता है और दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है।
होर्मुज संकट और आईपीओ की बूम से बाजार पर दोहरी मार
यमन के हूथी विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के एयरबेस पर मिसाइल हमलों और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के चलते मध्य पूर्व में युद्ध के बादल घने हो गए हैं, जिसने विदेशी निवेशकों में घबराहट भर दी है। इसके अलावा, सेकेंडरी मार्केट से नकदी सूखने की एक बड़ी वजह प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ की बाढ़ भी रही। इस हफ्ते 11 आईपीओ के जरिए बाजार से करीब 24,574 करोड़ जुटाए जा रहे हैं, जिसमें एनएसई और हीरो मोटर्स के बड़े इश्यू शामिल हैं। लिस्टिंग गेन के चक्कर में निवेशकों ने शेयर बाजार से भारी रकम निकालकर आईपीओ में झोंक दी, जिससे गिरावट और गहरी हो गई।
