नई दिल्ली। कदाचार या दुर्व्यवहार आदि मामलों में रेलकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच अब वीडियो कान्फ्रेंसिंग से भी हो सकेगी। जांच के लिए रेलकर्मियों को भौतिक रूप से अधिकारियों के समक्ष उपस्थित नहीं होना पड़ेगा। दूरदराज स्थानों पर तैनात कर्मचारियों, गवाहों और जांच से जुड़े अधिकारियों की उपस्थिति की आवश्यकता लगभग समाप्त हो जाएगी।
इस निर्णय से कर्मचारियों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति तो मिलेगी ही साथ ही रेलवे के कार्य भी प्रभावित नहीं होंगे। विभागीय जांच की प्रक्रिया भी डिजिटल बनायी जा सकेगी। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने रेलकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक मामलों की जांच की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि रेलवे कर्मचारियों (अनुशासन और अपील) की अनुशासनात्मक जांच वीडियो कान्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से भी कराई जा सकती है। यह व्यवस्था केवल महामारी या प्राकृतिक आपदा जैसी असाधारण परिस्थितियों तक सीमित नहीं है। अनुशासनात्मक प्राधिकारी यदि लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से संतुष्ट हैं, तो वीसी के जरिए जांच कराने का निर्णय ले सकते हैं।
रेलवे बोर्ड के निदेशक (स्थापना) प्रिय गोपालकृष्णन ने पत्र लिखकर सभी भारतीय रेलवे और प्रोडक्शन यूनिट को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। नई व्यवस्था के मुताबिक नियमों में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है कि वीडियो कान्फ्रेंसिंग से जांच सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में ही की जा सकती है।
परिस्थितियों को देखते हुए अनुशासनात्मक प्राधिकारी स्वयं वीसी के माध्यम से जांच कर सकते हैं या किसी जांच प्राधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। रेलवे बोर्ड ने जोर देकर स्पष्ट किया है कि वीसी के माध्यम से जांच कराने का अधिकार मिलने का अर्थ प्रक्रिया में किसी तरह की ढील नहीं है। जहां भी डिजिटल माध्यम से अनुशासनात्मक जांच कराने का प्रस्ताव हो, वहां कार्यवाही 22 मई 2024 के तहत अधिसूचित नियमों के अनुसार ही की जानी होगी।
रेलवे बोर्ड ने विशेष रूप से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। यानी, डिजिटल माध्यम अपनाने के बावजूद कर्मचारी को आरोपों के खिलाफ अपना पक्ष रखने, संबंधित प्रक्रिया में भाग लेने और नियमों के तहत उपलब्ध अवसरों का उपयोग करने का उचित मौका मिलना जरूरी होगा।
रेलवे बोर्ड के इस स्पष्टीकरण से विभागीय जांच की प्रक्रिया में डिजिटल माध्यम के इस्तेमाल का दायरा बढऩे की संभावना है। दरअसल, रेलवे नेटवर्क में अधिकारियों, जांच प्राधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित पक्षों की भौतिक मौजूदगी के कारण कई बार जांच लंबी खिंच जाती है।
ऐसे मामलों में वीसी एक वैकल्पिक माध्यम के रूप में उपयोगी होगी। हालांकि, जांच की वैधता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हर मामले में नियमों का पालन और आवश्यक कारणों का रिकार्ड महत्वपूर्ण रहेगा। खासतौर पर जहां अनुशासनात्मक प्राधिकारी लिखित कारणों के आधार पर वीसी जांच का निर्णय लेते हैं, वहां उस निर्णय का आधार रिकार्ड पर होना जरूरी होगा।
