जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गुरुवार को उस वक्त अफरा तफरी मच गई जब सोनोग्राफी केंद्र के भवन का एक बड़ा छज्जा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। इस गंभीर वाकये के दौरान छज्जे के ठीक नीचे किसी भी मरीज या परिजन के मौजूद न होने से 1 बड़ा हादसा टल गया। अस्पताल परिसर में जांच कराने पहुंचे सैकड़ों लोगों के बीच इस अप्रत्याशित घटना से दहशत का माहौल बन गया। लंबे समय से खस्ताहाल इस भवन के जर्जर हिस्से के ढहने की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया और तुरंत सुरक्षा व्यवस्थाओं की निगरानी शुरू कर दी गई, जिससे परिसर में जुटी भारी भीड़ को सुरक्षित दायरे में रोका जा सका।
चेतावनी के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक सोनोग्राफी विंग जिस इमारत में संचालित हो रही है, उसकी तकनीकी स्थिति काफी समय से असुरक्षित बनी हुई थी। संबंधित विभाग द्वारा पूर्व में कई औपचारिक पत्र भेजकर प्रबंधन का ध्यान इस गंभीर खतरे की ओर आकर्षित किया जा चुका था। इन पत्राचारों में स्पष्ट उल्लेख था कि भवन की छत और बाहरी दीवारें कमजोर हो चुकी हैं, जिन्हें समय रहते खाली कराना जरूरी है। इसके उपरांत भी सेंटर को किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के ठोस प्रयास धरातल पर नहीं उतारे गए। प्रतिदिन सैकड़ों मरीज सोनोग्राफी परीक्षण के लिए कतारों में खड़े रहते हैं, जिससे हर पल किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती थी। पूर्व चेतावनियों को नजरअंदाज करने की कार्यप्रणाली अब सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर रही है।
मरीजों की सुरक्षा पर उठे कई गंभीर सवाल
इस हादसे के बाद अब अस्पताल प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जर्जर संरचनाओं की समीक्षा करने की है। दैनिक स्तर पर उपचार के लिए दूर दराज से आने वाले लोगों का जीवन इस प्रकार के असुरक्षित भवनों के कारण दांव पर लगा रहता है। जानकारों का कहना है कि यदि भविष्य में ऐसे अनपेक्षित हादसों से बचना है तो तत्काल प्रभाव से पूरी इमारत की तकनीकी जांच कराकर वैकल्पिक भवन में सेवाओं को स्थानांतरित करना होगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस घटना से सबक लेकर क्या कड़े कदम उठाते हैं या फिर किसी बड़ी त्रासदी की प्रतीक्षा की जाएगी। समय रहते उचित निर्णय लेने से ही सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में आम जनता का भरोसा कायम रह सकेगा।
