जबलपुर। महाकौशल क्षेत्र के एकमात्र शासकीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई और सीटी स्कैन की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। रेडियोलॉजी विभाग के तहत संचालित इस महत्वपूर्ण सुविधा का सबसे अधिक उपयोग न्यूरोसर्जरी विभाग के गंभीर मरीजों के लिए होता है। इसके साथ ही अस्थि रोग और पेट संबंधी जटिल बीमारियों के उपचार में भी डॉक्टरों को इन्हीं परीक्षणों का सहारा लेना पड़ता है। व्यवस्था में आई भारी गड़बड़ी के कारण यहां आने वाले जरूरतमंद पीड़ितों को समय पर यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल के विभिन्न विभागों में गंभीर अवस्था में पहुंचने वाले लोगों के लिए जांच प्रक्रिया सुगम होने के बजाय एक बड़ी समस्या साबित हो रही है, जिससे उनके समुचित उपचार में रुकावट आ रही है।
ओपीडी के आयुष्मान कार्डधारी मरीजों पर भारी निजी खर्च
ओपीडी में परामर्श लेने वाले आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को नि:शुल्क जांच का लाभ सरलता से नहीं मिल पा रहा है। सरकारी योजना का पात्र होने के बावजूद उन्हें अस्पताल परिसर में जांच कराने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विवश होकर इन मरीजों को निजी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है, जहां उन्हें अपनी जेब से मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है।
रिपोर्ट मिलने में 5 दिन की जानलेवा देरी
अस्पताल में भर्ती मरीजों का दबाव इतना अधिक है कि जांच होने के बाद भी परिणाम मिलने में 4 से 5 दिन का वक्त लग रहा है। सिर की चोट या अन्य आपातकालीन स्थितियों में समय पर डायग्नोसिस न होने से पीड़ित की शारीरिक स्थिति नाजुक हो जाती है। परीक्षण परिणाम में हो रहे इस विलंब से सही समय पर सर्जरी या दवा शुरू करने में बाधा आ रही है।
