जबलपुर। जबलपुर के कलेक्ट्रेट स्थित आधार केंद्र पर दस्तावेजों की गहन जांच से बरसों पुरानी जटिल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है। जिसके जीवंत उदाहरण आज देखने को मिले। जिले के ई-गवर्नेंस के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर चित्रांशु त्रिपाठी और उनकी टीम ने कई नामों को उनकी अधिकृत पहचान दिला दी। श्री त्रिपाठी के अनुसार सिवनी निवासी रोहित की 7वीं कक्षा के बाद 3 साल से रुकी पढ़ाई की रुकावट दूर की गई। इसी प्रकार सतना के एक छात्र और एक बुजुर्ग महिला के अटके प्रकरण भी सफलतापूर्वक निपटाए गए। दरअसल कई लोग पहचान पत्र न मिलने पर दोबारा नया आवेदन कर देते हैं, जिससे डेटा रिजेक्शन की स्थिति बन जाती है। जबलपुर केंद्र पर अधिकारियों द्वारा पिनकोड, जन्मतिथि और जन्म वर्ष के मिलान से मूल रिकॉर्ड खोजकर पहचान पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिसके चलते अब आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में आवेदक यहां पहुंच रहे हैं।
पुराने रिकॉर्ड से फंस रहा है पेंच
जानकारी के अनुसार वर्ष 2012, 2013 अथवा 2014 में बने पहचान पत्रों की मूल प्रति न मिलने पर नागरिक प्रायः नवीन पंजीकरण करवा लेते हैं। सिस्टम में पूर्व से डेटा मौजूद होने के कारण प्रत्येक नया प्रयास स्वतः निरस्त होता रहता है। किसी भी प्रविष्टि में मामूली अंतर आने पर केंद्रीय डेटाबेस से पुरानी जानकारी का संधान करना अत्यंत श्रमसाध्य कार्य बन जाता है। इस प्रक्रिया में प्रति व्यक्ति 1 से 2 घंटे का समय व्यतीत होता है। सामान्य केंद्रों के संचालक अधिक संख्या में काम निपटाने की होड़ में ऐसे पेचीदा मामलों को अधूरा छोड़ देते हैं, जिससे आमजन आवश्यक सेवाओं तथा शाला प्रवेश के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
पब्लिक इस तरह की गलती न करे
प्रशासनिक स्तर पर आम जनता को यह परामर्श दिया जा रहा है कि पूर्व में कभी भी पंजीयन हुआ हो तो नया फॉर्म भरने की भूल न करें। पुरानी पावती अथवा किसी भी पूर्व रसीद के साथ केंद्र पर संपर्क करने से ऑपरेटर विस्तृत सर्च प्रोटोकॉल के जरिए पुराना बायोमेट्रिक व डेमोग्राफिक विवरण खोज निकालते हैं। धैर्यपूर्वक की गई तकनीकी पड़ताल से नाम, पते या जन्म विवरण का तारतम्य मिलते ही पूर्व डेटाबेस को सक्रिय कर दिया जाता है। कर्तव्यनिष्ठा से की गई इस प्रक्रिया से न सिर्फ आवेदकों के धन व समय की बचत हो रही है, बल्कि दूरदराज के नागरिकों का प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा भी सुदृढ़ हुआ है।
टीम वर्क ने किया कमाल:त्रिपाठी
असल में ये मुश्किल दिखने वाले काम हमारी टीम की अथक मेहनत और लगन से मुम्किन हो सका। दस्तावेजों के कारण परेशानी झेल रहे लोग खुश होकर लौटे,इससे अच्छा और कुछ नहीं है।
चित्रांशु त्रिपाठी, जिला प्रबंधक, ई-गवर्नेंस,जबलपुर
