जबलपुर। नगर निगम सीमा में दूषित जलापूर्ति की गंभीर समस्या को देखते हुए महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने कड़ा कदम उठाया है। शहर में नालियों के बीच से गुजरने वाली 80 प्रतिशत पेयजल पाइप लाइनों की जमीनी पड़ताल के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया है। यह समिति मौके पर जाकर प्रत्यक्ष निरीक्षण करेगी और 25 दिनों की तय समय सीमा के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इससे पूर्व नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे के नेतृत्व में विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने महापौर कार्यालय पहुंचकर तख्तियों के साथ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने गंदे पानी की सप्लाई और सफाई व्यवस्था में बरती जा रही लापरवाही पर गहरा आक्रोश जताया, जिसके बाद महापौर ने यह आदेश जारी किया।
नालियों में बिछी पाइप लाइनों की होगी जांच
जांच समिति के कामकाज को गति देने के लिए 21 अगस्त को तत्काल बैठक बुलाई गई है, जिसमें समिति के सभी सदस्यों को कार्य विभाजन के तहत जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के पूर्व आदेशों के तहत जिन संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उन्होंने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया, उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जांच में दोषी साबित होने पर लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। इस दौरान नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रतिनिधियों ने नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे उठाए। महापौर से वार्ता के दौरान जनसंगठन के टी.के. रायघटक, डॉ. ए.बी. श्रीवास्तव, मनीष शर्मा, यशवंत कोष्टा, डी.के. सिंह, संतोष श्रीवास्तव, पी.एस. राजपूत, अर्जुन कुमार परीछा, अशोक यादव, श्याम सोलंकी, मयंक राज, अंकित गोस्वामी, सुशीला कनौजिया, गीता पाण्डे, नंदलाल कोष्टा और राममिलन शर्मा उपस्थित रहे।
लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज
शहर की स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के लिए भी अलग से सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रत्येक जोन में पदस्थ स्वास्थ्य अधिकारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र का सघन जमीनी मुआयना करने और वस्तुस्थिति की रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया गया है। इन सभी रिपोर्टों का बारीकी से मूल्यांकन करने के लिए जल्द ही अधिकारियों की एक विशेष समीक्षा बैठक आयोजित होगी। इसके साथ ही संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और मच्छरों के प्रकोप को नियंत्रित करने के मकसद से सभी प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर कीटनाशक दवाओं का नियमित छिड़काव और फॉगिंग कराने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
