जबलपुर। गोकलपुर स्थित शासकीय बाल संप्रेषण गृह में बंद 50 बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। यहां लूट व आर्म्स एक्ट के मामले में 10 अगस्त को दाखिल और 19 अगस्त को जमानत पर छूटे बेलखेड़ा निवासी 17 वर्षीय किशोर के साथ 10-12 दबंग बाल अपचारियों ने बेरहमी से मारपीट की। पीड़ित से सुरक्षित रहने के बदले 12 अगस्त को फोन पर प्रति सप्ताह 1000 रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। रकम न मिलने पर स्टेशनरी शार्पनर से निकाली गई ब्लेड से किशोर के दोनों हाथों को लहूलुहान कर नाम खुरच दिया गया। अधीक्षक शैलेश कुमार व सहायक अधीक्षक अरुण कुमार ने औचक तलाशी में 2 मोबाइल फोन, गांजा और गुटखा बरामद कर विस्तृत रिपोर्ट बाल न्यायालय यानी जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को भेजी है।
सुधार गृह के अंदर बैरकों में खुली गुंडागर्दी
घर पहुंचने पर पीड़ित ने जब अपने परिजनों को आपबीती सुनाई तो इस संगीन प्रकरण से पर्दा उठा। रिहाई के बाद सामने आए इस वाकये ने बाल संरक्षण केंद्र की अंदरूनी कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि सुधार के नाम पर संचालित केंद्र में नए आने वाले निर्दोष और कमजोर बच्चों को लगातार शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी जाती हैं। वहां मौजूद अनियंत्रित गुट अनुशासनहीनता फैलाकर कमजोर लड़कों पर अपना दबदबा कायम करने की कोशिश करता है। परिजनों ने प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे मामले में त्वरित हस्तक्षेप करने और दोषी पाए जाने वाले तत्वों पर सख्त दंडात्मक कदम उठाने की गुहार लगाई है।
निगरानी तंत्र की नाकामी पर उठे कड़े सवाल
बाल सुधार गृह की चारदीवारी के भीतर नशीली सामग्री और संचार उपकरणों का मिलना सुरक्षा घेरे में भारी सेंधमारी की तरफ साफ इशारा करता है। नियमानुसार जिस परिसर का मुख्य दायित्व भटके हुए किशोरों की काउंसलिंग कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, वहां प्रतिबंधित नशीले पदार्थों का सेवन और अवैध वसूली का धंधा फल-फूल रहा है। सुरक्षाकर्मियों और निगरानी तंत्र की मौजूदगी के बावजूद बैरकों तक आपत्तिजनक सामान पहुंचना कर्मचारियों की कार्यशैली पर संदेह पैदा करता है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब न्यायिक संस्था के दिशा-निर्देशों पर कठोर कदम उठाए जाने की प्रतीक्षा की जा रही है, ताकि संस्थान का वातावरण भयमुक्त हो सके।
