हाईकोर्ट ने कहा है कि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जबकि उनके संबंध में पर्याप्त जानकारी जांच एजेंसी के पास उपलब्ध है। ऐसे मामलों की जांच प्रभावी, पेशेवर और समयबद्ध होना न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है। कोर्ट ने जांच एजेंसी से प्रत्येक छापे का विवरण, आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास, अन्य राज्यों की पुलिस से हुए पत्राचार, एकत्रित इलेक्ट्रानिक साक्ष्य तथा जांच पूरी करने की समय-सीमा सहित विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर यह भी माना कि साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रदेश में ऐसे मामलों की जांच के लिए स्थायी विशेष जांच दल (एसआईटी) अथवा विशेष तंत्र की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।
जबलपुर। एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने 6.24 लाख रुपए की साइबर ठगी के एक मामले की जांच में धीमी प्रगति पर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक, गोराबाजार थाना प्रभारी और विवेचना अधिकारी को अगली सुनवाई पर मूल केस डायरी सहित व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
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