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रेलवे अस्पताल की लेडी डाक्टर, क्लर्क का कारनामा, निजी कैंसर अस्पताल को 15 की जगह 17 करोड़ का किया भुगतान

 सीबीआई-विजिलेंस की जांच का दायरा जबलपुर के चिकित्सा विभाग तक पहुंचा

जबलपुर/भोपाल. पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल के निशातपुरा कोच फैक्ट्री स्थित रेलवे अस्पताल में एक महिला चिकित्सक व महिला क्लर्क का कारनामा सीबीआई व जबलपुर मुख्यालय की विजिलेंस जांच में सामने आया है, जिसमें एक निजी कैंसर अस्पताल को 15 करोड़ की जगह 17 करोड़ का भुगतान किया गया.

बताया जाता है कि जांच में इलाज के बिलों के भुगतान को लेकर गड़बड़ी सामने आई है। सीबीआई और रेलवे विजिलेंस की संयुक्त कार्रवाई में करीब दो करोड़ रुपए की वित्तीय गड़बड़ी मिली है। मामला निजी अस्पतालों के बिलों के भुगतान से जुड़ा है। 2024 से अब तक यानी ढाई साल में एक निजी कैंसर हॉस्पिटल को 15 की जगह करीब 17 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया।

दरअसल, निजी कैंसर हॉस्पिटल, के बिलों की जांच कर उन्हें आगे भेजने की जिम्मेदारी डॉ. प्रियंका प्रसाद के पास थी। इसके बाद बिलों का परीक्षण कर उन्हें पास करने और अकाउंट सेक्शन तक भेजने का काम रेलवे अस्पताल में बाबू के पद पर कार्यरत प्रतिभा वर्मा करती थीं। रेलवे और निजी अस्पतालों के अनुबंध में यह शर्त है कि इलाज के बिल से 12त्न कम भुगतान रेलवे करेगा। लेकिन इस कैंसर अस्पताल का पूरा बिल पे कर दिया गया। आरोप है कि डॉक्टर प्रियंका और बाबू प्रतिभा व अन्य बिल की बाकी राशि अस्पताल से नकद ले लेती थीं। इस राशि का बंटवारा रूम नंबर 17 में किया जाता था। फिलहाल सीबीआई और रेलवे की विजिलेंस टीम सभी अनुबंधित अस्पतालों के भुगतान रिकॉर्ड और उनसे संबंधित डॉक्टरों- बाबुओं की भूमिका की जांच कर रही है। इसके बाद कार्रवाई संभव है।

2 माह पहले हुई थी शिकायत

बताया जाता है कि इस गड़बड़झाला की शिकायत करीब दो महीने पहले रेलवे अधिकारियों तक पहुंची थी। इसके बाद रेलवे अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर अजय डोंगरा ने मामला रेलवे विजिलेंस को सौंपा। विजिलेंस ने पहले प्रारंभिक जांच की और वित्तीय अनियमितता के संकेत मिलने पर पिछले दिनों सीबीआई के साथ संयुक्त कार्रवाई की। टीम ने अस्पताल से बिल, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड जब्त कर जांच शुरू कर दी है।

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