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लड़ाई सिर्फ चुनावी हार जीत की नहीं बल्कि लोकतंत्र की रक्षा की है:भूरिया,देखें वीडियो




आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूरिया ने उठाई मुखर आवाज,कई मुद्दों पर सरकार को घेरा

जबलपुर। जबलपुर में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक विक्रांत भूरिया ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उनके साथ कॉंग्रेस के जिलाध्यक्ष सौरव नाटी शर्मा भी विशेष रूप से मौजूद रहे। पत्रकार वार्ता के दौरान विक्रांत भूरिया ने मुख्य रूप से संविधान की रक्षा और राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को असंवैधानिक तरीके से निरस्त किए जाने के गंभीर मुद्दे को जोरशोर से उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से एक स्वतंत्र इलेक्शन पिटीशन दायर की गई है जिसे अदालत द्वारा स्वीकार भी कर लिया गया है। इसके अलावा उन्होंने केन-बेतवा जल परियोजना के सर्वे में भारी खामियों, विस्थापितों को मुआवजा न मिलने, ग्राम सभाओं की अनुमति के बिना कार्य होने और फर्जी अंगूठा निशान लगाने जैसे संगीन मामलों पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने दो टूक कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक चुनाव की नहीं बल्कि पूरे देश में लोकतंत्र और जनता के अधिकारों को बचाने की एक बहुत लंबी लड़ाई है जिसे हर स्तर पर लड़ा जाएगा।

​हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंचा नामांकन रद्दीकरण का मामला

​विक्रांत भूरिया ने चर्चा करते हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को पूरी तरह से असंवैधानिक तरीके से खारिज किए जाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में इस प्रकार की मनमानी लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों पर सीधा हमला है। इस अन्याय के खिलाफ कानूनी और संवैधानिक उपाय अपनाते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से एक स्वतंत्र इलेक्शन पिटीशन दाखिल कर दी गई है जिस पर अदालत ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायपालिका के माध्यम से इस मामले में सच्चाई सामने आएगी और लोकतंत्र के साथ होने वाले खिलवाड़ का पर्दाफाश होगा।

​केन-बेतवा परियोजना और मुआवजे में भ्रष्टाचार का काला सच

​प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केन-बेतवा लिंक जल परियोजना को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए। नेताओं ने आरोप लगाया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सर्वे कार्य में भारी खामियां हैं और प्रभावित विस्थापितों को आज तक उचित मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है। स्थानीय जनता को दरकिनार कर सभी कार्य ग्राम सभाओं की अनिवार्य अनुमति के बिना ही धड़ल्ले से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। वन अधिकार कानून का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है जिससे आदिवासी समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। सरकार के इसी अहंकारी रवैये और प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ अब आम जनता और जनप्रतिनिधि सड़क पर उतरकर कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

​फर्जी अंगूठा निशान घोटाले से हिल गया पूरा प्रशासनिक तंत्र

​प्रेस कांफ्रेंस में  अंगूठा चोरी घोटाले का मामला भी उठाया गया।  आरटीआई से प्राप्त पुख्ता दस्तावेजों का हवाला देते हुए यह बड़ा पर्दाफाश किया गया कि सरकारी योजनाओं और दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने के लिए मृत व्यक्तियों तक के अंगूठे लगवाए गए हैं। इस गंभीर अनियमितता ने स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदारों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर भी नेताओं ने अपनी गहरी चिंता जाहिर की और जनता से आह्वान किया कि वे ऐसे भ्रष्ट और तानाशाही तरीकों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं ताकि आम आदमी के बुनियादी अधिकारों की प्रभावी रक्षा की जा सके।

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