मप्र से ट्रांसको के जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत ओझा ने किया प्रतिनिधित्व
जबलपुर। नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर स्थित जोरावर ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय विद्युत सुरक्षा दिवस 2026 के उपलक्ष्य में एक अहम राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्युत अग्नि सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाते हुए दुर्घटना मुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया। केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने संदेश में कहा कि भारत की प्रगति और समृद्धि के लिए बिजली की निरंतर आपूर्ति के साथ ही सुरक्षा संस्कृति को अपनाना अनिवार्य है। वहीं विद्युत एवं नवीन नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने नागरिकों से दैनिक जीवन में बिजली के सुरक्षित उपयोग की अपील की। सम्मेलन में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद, सदस्य विजय कुमार सिंह तथा बीएसईएस के निदेशक अमल सिन्हा ने विचार साझा किए। मध्य प्रदेश की ओर से मप्र पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के सहायक अभियंता और जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत ओझा ने प्रतिनिधित्व किया।
शून्य दुर्घटना के लिए सतर्कता है सबसे जरूरी
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि विद्युत सुरक्षा को केवल तकनीकी नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी समझा जाए। घरों में लोड बढ़ाने या वायरिंग के समय विशेषज्ञों की सलाह लेना अनिवार्य है। उपकरणों की नियमित जांच और वार्षिक अनुरक्षण अनुबंध को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि अग्नि दुर्घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लग सके। कार्यस्थलों पर जोखिम मुक्त वातावरण बनाने के साथ ही सुरक्षा को दैनिक कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।
विकसित भारत के संकल्प में सुरक्षा का महत्व
विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य सुरक्षित बिजली के बिना अधूरा है। सम्मेलन का मुख्य संदेश यह रहा कि बिजली का जिम्मेदार उपयोग सामूहिक उत्तरदायित्व है। हर नागरिक की सजगता ही कल की सुरक्षा की गारंटी है। छोटी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए जागरूक रहकर ही हम एक सुरक्षित और दुर्घटनामुक्त भारत के स्वप्न को साकार कर सकते हैं। यह कार्यक्रम विद्युत सुरक्षा के प्रति देशव्यापी जन-आंदोलन का आधार बनेगा।
