आगरा. उत्तर प्रदेश के आगरा के कैंट रेलवे स्टेशन पर रविवार को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों और स्टेशन मास्टर के बीच हुआ विवाद तूल पकड़ता जा रहा है और अब इस मामले में राजनीति भी शुरू हो गई है. डिप्टी एसएस को पटककर पीटने पर रेलवे मजदूर यूनियन ने प्रदर्शन किया, जिसके दबाव में आरपीएफ के 4 कर्मचारी सस्पेंड कर दिये गये.
वहीं घटना का वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा सांसद राजकुमार चाहर भी रेलवे स्टेशन पहुंचे और आरपीएफ अधिकारियों को फटकार लगाई. ये आप लोगों के हाथ लगाने की वजह से ही तो यहां आना पड़ा है हमें. वहीं जब पुलिस अधिकारी ने कहा कि हमें आदेश मिला है, हम कार्रवाई कर रहे हैं तो सांसद राजकुमार चाहर ने पूछा कि कौन आदेश कर रहा है. आदेश मिला है. खुद की भी बुद्धि होती है. पब्लिक से कैसे डील किया जाता है. इसीलिए तो मुझे आना पड़ा कि स्टेशन मास्टर को घसीट कर ले जा रहे हैं. वर्दी की भी बदनामी करोगे और सरकार की भी. बद्तमीज कहीं के.
आरपीएफ के चार कर्मी निलंबित
वहीं एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले में आरपीएफ के दो एएसआई सहित चार कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है. जानकारी के मुताबिक, हीराकुंड एक्सप्रेस पूर्वाह्न लगभग 11 बजे कैंट रेलवे स्टेशन पर पहुंची थी और वहां से रवाना होने के बाद थोड़ी दूर जाकर रुक गई, तभी आरपीएफ जवानों ने चेन पुलिंग के आरोप में एक महिला को पकड़ लिया. जानकारी के अनुसार, स्टेशन पर मौजूद स्टेशन मास्टर नरेंद्र चाहर ने आरपीएफ जवानों से कहा कि महिला ने चेन पुलिंग नहीं की है, लिहाजा उसे छोड़ दिया जाए और इसी बात को लेकर कहासुनी बढ़ गई, जिसके बाद आरपीएफ जवानों ने स्टेशन मास्टर की कथित तौर पर पिटाई कर दी.
मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद रेलवे कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया. अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में एएसआई मेघराज मीणा, एएसआई बालकिशन, कांस्टेबल जितेंद्र और कांस्टेबल बदन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) शिवम शर्मा ने बताया, आगरा में आरपीएफ और स्टेशन मास्टर के बीच हुई मारपीट के मामले में तीन सदस्यीय जांच समिती गठित कर दी गई है.
क्यों निलंबित हुए आरपीएफ के जवान
उन्होंने कहा, जांच निष्पक्ष हो, इसके लिए आरपीएफ के आरोपी जवानों को निलंबित कर दिया गया है. जांच समिति को जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. रिपोर्ट आने के बाद रेलवे अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी.
