जबलपुर। मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर ने एमबीबीएस छात्रों की आगामी परीक्षाओं के लिए परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नेशनल मेडिकल कमीशन की कॉम्पिटेंसी बेस्ड मेडिकल एजुकेशन गाइडलाइन के अनुरूप नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सितंबर 2026 में आयोजित होने वाली एमबीबीएस परीक्षाओं से यह नया पैटर्न प्रभावी होगा। इस बदलाव का सीधा असर 2019 और उसके बाद प्रवेश लेने वाले सभी सीबीएमई बैच के विद्यार्थियों पर पड़ेगा। कुलपति डॉ. अशोक खंडेलवाल के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. आदित्य ठाकुर ने बताया कि अब छात्रों को रटने के बजाय विषयों को समझकर उत्तर देने होंगे, जिससे उनके तार्किक कौशल का बेहतर आकलन हो सकेगा।
परीक्षा के नए स्वरूप में कुल 100 अंकों का होगा प्रश्नपत्र
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी सूचना के अनुसार एमबीबीएस की सैद्धांतिक परीक्षा अब कुल 100 अंकों की होगी। इसे पांच अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है ताकि छात्रों की गहन समझ की परीक्षा ली जा सके। नए पैटर्न में 10 बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे जो प्रति प्रश्न 1 अंक यानी कुल 10 अंक के रहेंगे। इसके अलावा 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न होगा जो 10 अंक का रहेगा। लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या 5 तय की गई है जिनमें 1 प्रश्न एटॉम आधारित होगा और प्रत्येक 7 अंक के रहेंगे, जिसका कुल योग 35 अंक होगा। अप्लाइड प्रश्न 5 होंगे जो क्लीनिकल परिदृश्य पर आधारित रहेंगे और प्रति प्रश्न 5 अंक यानी कुल 25 अंक के होंगे। अंत में 5 तार्किक यानी रीजनिंग प्रश्न होंगे जो प्रति प्रश्न 4 अंक यानी कुल 20 अंक के होंगे।
पुराने परीक्षा पैटर्न को बदलकर नई व्यवस्था पूरी तरह लागू
पहले एमबीबीएस की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र का स्वरूप काफी अलग था। उस दौरान 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आते थे जिनमें प्रति प्रश्न 20 अंक निर्धारित थे। साथ ही 6 लघु उत्तरीय प्रश्न होते थे जिनमें प्रति प्रश्न 5 अंक मिलते थे। इसके अलावा 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न होते थे जिनमें प्रति प्रश्न 2 अंक मिलते थे और 10 बहुविकल्पीय प्रश्न 1 अंक के होते थे। इस पुरानी पद्धति को अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। विश्वविद्यालय ने अपने आधिकारिक पोर्टल पर इस संबंध में विस्तृत अधिसूचना अपलोड कर दी है ताकि छात्रों को किसी प्रकार की दुविधा न हो। सभी संबंधित मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यार्थियों को इस नए पैटर्न की जानकारी दें ताकि वे परीक्षा की तैयारी उसी के अनुसार सुनिश्चित कर सकें।
