khabar abhi tak

बंदियों द्वारा बनाए गए समोसे, आलूबंडे अब शहर में बिकेगें, जबलपुर सेंट्रल जेल में आत्म निर्भर बनाने अनूठी पहल

 

 जबलपुर। जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय कारागार में बंदियों के हाथों से तैयार होने वाले समोसे और आलूबंडे का जायका अब बाहर
लोगों तक पहुंच गया है। इन व्यंजनों की लोकप्रियता को देखते हुए जेल प्रशासन अब इन व्यजंों की आनलाइन डिलीवरी शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है।

                             जेल प्रबंधन का मानना है कि यदि योजना साकार होती है तो जेल में तैयार समोसे और आलूबंडे सीधे लोगों के घर तक पहुंच सकेंगे। फिलहाल यह जेल के गेट पर केंटीन से बेचा जा रहा है। जेल प्रबंधन का उद्देश्य केवल स्वादिष्ट नाश्ता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बंदियों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोडऩा भी है। इसी सोच के तहत जेल में बंदियों को समोसा, आलूबंडा सहित विभिन्न खाद्य पदार्थ बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महंगाई के दौर में भी कैंटीन में समोसा और आलूबंडा मात्र 10 रुपये प्रति नग की कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है। हर सुबह करीब आठ बजे जेल से तैयार होकर स्नैक्स कैंटीन पहुंचते हैं। केंटीन को प्रारंभ हुए लगभग एक माह हुए है। धीरे-धीरे बिक्री बढ़कर प्रतिदिन लगभग एक हजार समोसे और आलूबंडे तक पहुंच गई है। इस योजना से जुड़े बंदियों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।

जेल प्रहरियों की निगरानी में संचालित है पूरी व्यवस्था-

प्रशिक्षण प्राप्त बंदी जेल परिसर में ही व्यंजन तैयार करते हैं। खुली जेल के बंदी जेल के बाहर संचालित कैंटीन के माध्यम से उनकी बिक्री करते हैं। पूरी व्यवस्था जेल प्रहरियों की निगरानी में संचालित की जाती है।

बिक्री पर 50 पैसे का कमीशन दिया जाता है

प्रत्येक समोसे या आलूबंडे की बिक्री पर उन्हें 50 पैसे का कमीशन दिया जाता है। इससे वे काम के प्रति प्रोत्साहित होते हैं और रिहाई के बाद रोजगार शुरू करने का आत्मविश्वास भी प्राप्त कर रहे हैं।

अब आर्डर भी लिए जा रहे है-

स्नैक्स की बढ़ती मांग को देखते हुए कार्यालयों, संस्थानों और आयोजनों के लिए आर्डर भी लिए जा रहे हैं। कैंटीन में संपर्क कर उपभोक्ता पहले से आर्डर देकर तय समय पर डिलीवरी प्राप्त कर सकते हैं।

सेवानिवृत्त जेल कर्मचारी निभा रहे हैं जिम्मेदारी-

वर्तमान में एक सेवानिवृत्त जेल कर्मचारी जेल से कैंटीन तक समोसे और आलूबंडे पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जिसके लिए उन्हें पारिश्रमिक भी दिया जाता है। निर्माण में जेल के बंदी और कैंटीन में समोसा, आलूबंडा विक्रय की जिम्मेदारी खुली जेल के बंदी संभाल रहे है। इस प्रक्रिया से बंदी प्रशिक्षण प्राप्त कर रिहा होने के बाद आत्मनिर्भर बन सकते है।


Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak