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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: कैदी को पत्नी और नवजात बच्चे की देखभाल के लिए जमानत



जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मानवीय आधार पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी को अस्थाई जमानत दी है। सिंगरौली निवासी लाला राम वैश्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने आरोपी को 12 दिनों की अस्थाई जमानत मंजूर की है। हाई कोर्ट ने यह जमानत आरोपी की पत्नी और उसके हाल ही में जन्में नवजात बच्चे की देखभाल के लिए दी है। कोर्ट ने इस फैसले से पहले मामले से जुड़े सभी तथ्यों का गहन सत्यापन कराया था। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि आरोपी की पत्नी ने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया है और घर में देखभाल करने वाला कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं है। इसके अलावा, एक अन्य मामले में हाई कोर्ट की एकल पीठ ने शहडोल के जैतपुर में गांजा तस्करी के आरोपी मनीष शुक्ला को बड़ी राहत दी है। जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकल पीठ ने उसे जमानत देते हुए पाया कि उसे केवल सह-अभियुक्त के बयानों के आधार पर इस मामले में आरोपी बनाया गया था। अधिवक्ता निखिल भट्ट ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए ठोस तर्क दिए, जिसके बाद न्यायालय ने आरोपी को रिहाई के आदेश दिए।

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