जबलपुर। गोरखपुर तहसील स्थित अतिरिक्त तहसीलदार न्यायालय ने बकाया भुगतान न करने पर ओरिएंटल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। पूर्व कर्मचारियों द्वारा दायर शिकायतों के आधार पर न्यायालय ने संस्थान को 2 लाख 21 हजार रुपए की राशि जल्द जमा करने का निर्देश दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि नौकरी छोड़ने के 2 से 3 वर्ष बाद भी उनका पैसा नहीं मिला है। न्यायालय ने संस्थान को 10 दिन का समय दिया है। यदि तय समय में भुगतान नहीं हुआ, तो प्रशासन संस्थान की चल और अचल संपत्ति कुर्क कर लेगा। संजीवनी नगर थाना और हल्का पटवारी को संपत्तियों का ब्यौरा जुटाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। एमजेसीआर के तहत जारी इस नोटिस से संस्थान प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।
अदालत का अल्टीमेटम दस दिन में भुगतान करें
न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संजीवनी नगर थाने को कार्रवाई के लिए अधिकृत किया है। पटवारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे संस्थान की सभी संपत्तियों की सूची तत्काल रिपोर्ट के रूप में पेश करें। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जा रही है कि यदि संस्थान अपनी जिम्मेदारी से बचता है, तो सरकारी तंत्र कानूनी रूप से संपत्ति जब्त कर बकाया राशि वसूल सके। कर्मचारियों के लिए यह आदेश एक बड़ी राहत लेकर आया है। प्रशासनिक स्तर पर की गई यह कार्रवाई उन सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक चेतावनी है जो अपने कर्मचारियों के हितों और उनके मेहनत के पैसों को दबाकर रखते हैं।
प्रशासन की सख्ती से बकायादारों में मची खलबली
संस्थान के प्रबंधन पर लगे इन आरोपों के बाद कर्मचारियों को अपने लंबे समय से लंबित वेतन भुगतान की उम्मीद जगी है। प्रशासन द्वारा संपत्ति की कुर्की की तैयारी इस बात का संकेत है कि अब किसी भी तरह की देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून की यह प्रक्रिया पारदर्शी है और इसका उद्देश्य पीड़ित कर्मचारियों को उनका अधिकार दिलाना है।
