जबलपुर। शहर की पीने के पानी की 80 प्रतिशत पाइप लाइनें नालियों के बीच से गुजर रही हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर यह स्थिति सामने रखी है। याचिका में दावा किया गया है कि शहर में जलापूर्ति का 47 प्रतिशत पानी पीने के लायक नहीं बचा है। इस मामले की जांच के लिए एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी नियुक्त कर 1 माह में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन नगर निगम और जिला प्रशासन के असहयोग के चलते काम अधूरा रहा। 10 जुलाई को एनजीटी में सुनवाई के दौरान सामने आया कि आपसी तालमेल की कमी से स्थल निरीक्षण नहीं हो सका।
प्रशासनिक लापरवाही पर दी अंतिम चेतावनी
जस्टिस दिनेश कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार ने इस असहयोग को बेहद आपत्तिजनक माना है। एनजीटी ने अब प्रशासन को 2 सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने का अंतिम अवसर प्रदान किया है। इसके लिए एनजीटी रजिस्ट्री को निर्देशित किया गया है कि वे कलेक्टर जबलपुर और नगर निगम को पत्र लिखकर निरीक्षण में पूरा सहयोग सुनिश्चित करें। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए एडवोकेट प्रभात यादव ने स्पष्ट किया कि शहर की पाइप लाइनें 40 से 50 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं, जो पूरी तरह से जर्जर और क्षतिग्रस्त हैं। इन पुरानी लाइनों को बदलने के लिए आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए और न ही इसके लिए कोई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार की गई है।
