जबलपुर। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कंपनी प्रबंधन के भ्रष्टाचार में डूबे अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रहलाद मर्सकोले ने आदेशों की धज्जियां उड़ा दी हैं। श्री मर्सकोले को 29 जून को ईओडब्ल्यू की टीम ने 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। इस गंभीर घटना के बाद कंपनी प्रबंधन ने 7 जुलाई को उनका अतिरिक्त मुख्य अभियंता के पद से तबादला कर रीवा में कार्यपालन अभियंता के पद पर पदस्थ कर दिया। हालांकि, प्रबंधन के इस सख्त आदेश को ठेंगा दिखाते हुए प्रहलाद मसकोले अभी भी जबलपुर स्थित सिविल विभाग के कार्यालय में जमे हुए हैं। वे न केवल अपने पुराने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं, बल्कि महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने की आशंका भी बढ़ गई है।
आदेशों की खुली अवहेलना, फाइलों में खेल
कंपनी प्रबंधन के स्पष्ट निर्देश के बाद भी मर्सकोले का कार्यालय नहीं छोड़ना कई सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों की मानें तो मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। प्रहलाद मसकोले की मौजूदगी में जबलपुर सिविल विभाग के कामकाज पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। यह आरोप लगाया जा रहा है कि उनके कार्यकाल के दौरान निर्माण और पुननिर्माण के कार्यों में भारी धांधली की गई है। एक विशेष ठेकेदार अशोक कुमार द्विवेदी को लाभ पहुंचाने के लिए सारे नियम-कानून ताक पर रखे गए थे। अब माना जा रहा है कि वे कार्यालय में बैठकर उन पुराने घोटालों और भ्रष्टाचार के सबूतों को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रहलाद मसकोले द्वारा 10 लाख रुपये के बिल भुगतान के एवज में रिश्वत की मांग की गई थी, जिसके बाद ईओडब्ल्यू ने कार्रवाई की थी।
कार्यालय में अवैध तरीके से बैठ रहे अधिकारी
इंजीनियर के इस रवैये से कंपनी की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग गया है। जानकारों का कहना है कि वे बिना किसी आधिकारिक अनुमति के दफ्तर में बैठकर गोपनीय फाइलों को ठिकाने लगाने में जुटे हैं। इस मामले में ठेकेदार अशोक कुमार द्विवेदी की शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू ने 15 हजार रुपये रिश्वत लेने के मामले में उन्हें दबोचा था। अब कंपनी प्रबंधन की नाक के नीचे हो रही यह अवैध गतिविधि न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ की गई कार्रवाई को भी कमजोर कर रही है। विभाग के अन्य कर्मचारी भी इस स्थिति को लेकर सशंकित हैं कि आखिर एक तबादला हो चुके अधिकारी को कार्यालय में बैठने की हिम्मत कौन दे रहा है। यदि तत्काल कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कंपनी के रिकॉर्ड से महत्वपूर्ण सबूत हमेशा के लिए गायब हो सकते हैं।
