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पोर्टल की खामियों का दंड शिक्षकों को क्यों मिले,अन्याय बर्दाश्त नहीं



जबलपुर। मध्यप्रदेश में ई-अटेंडेंस व्यवस्था से शिक्षकों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह द्वारा जून 2026 में जारी नए निर्देशों के तहत एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज न होने पर कर्मचारियों का वेतन काटा जाएगा। भले ही कर्मचारी के खाते में वैध अवकाश जमा हों, लेकिन पोर्टल पर उपस्थिति न होने की स्थिति में उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा। इन निर्देशों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी और संकुल प्राचार्यों को वेतन देयक तैयार करते समय ई-अटेंडेंस को अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तुगलकी फरमान के खिलाफ मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के अटल उपाध्याय, देवेंद्र पचौरी, आलोक अग्निहोत्री, सतीश उपाध्याय, राजेश चतुर्वेदी, नरेश शुक्ला, विवेक रंजन शुक्ला, राम शंकर शुक्ला, राजा राम डेहरिया, वीरेन्द्र चंदेल, एस.पी. बाथरे, शहजाद सिंह द्विवेदी, रजनीश पाण्डे, दालचंद पासी, अजय दुबे, दिलराज झारिया, राकेश वर्मा, शैलेन्द्र गौतम, सतीश देशमुख, निशांक तिवारी, अंकित चौरसिया, शैलेन्द्र दुबे, अमित पटेल, विशाल मसीह, मनोहर रजक, अर्जुन सोमवंशी, मनीष लोहिया, सुशील गुप्ता, विनय नामदेव, अरुण पटेल और इन्द्रप्रताप यादव ने कड़ा विरोध जताया है।

​ऑनलाइन उपस्थिति से शिक्षक वर्ग का बड़ा शोषण

​विभाग के इस आदेश से शिक्षकों और मैदानी अमले में भारी असंतोष है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी के पास आकस्मिक, अर्जित, चिकित्सा या अन्य प्रकार के अवकाश नियमानुसार जमा हैं, तो उन्हें अनुपस्थित नहीं माना जाना चाहिए। अधिकांश मामलों में अवकाश आवेदन समय पर स्वीकृत नहीं हो पाते हैं, जिसके कारण पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज करने में तकनीकी समस्याएं आती हैं। इसके लिए कर्मचारी को दंडित करना पूरी तरह अनुचित है। राज्य कर्मचारी संघ ने शासन से मांग की है कि इस आदेश में तत्काल संशोधन किया जाए और कर्मचारियों के अर्जित अवकाशों का सम्मान करते हुए वेतन कटौती पर रोक लगाई जाए। किसी भी स्थिति में डिजिटल व्यवस्था के नाम पर कर्मचारियों के वाजिब हक और उनके वेतन का नुकसान नहीं होना चाहिए।

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