जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में नए भर्ती 60 जूनियर इंजीनियरों को दिल्ली स्थित राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान बदरपुर में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा अभियंताओं को ट्रांसमिशन सिस्टम के सुरक्षित एवं कुशल संचालन की जानकारी देना है। एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता मानव संसाधन एवं प्रशासन श्री धीरेंद्र सिंह ने बताया कि इस सत्र में ऑपरेशन, मेंटेनेंस, ग्रिड प्रबंधन, प्रोजेक्ट क्रियान्वयन और अग्नि सुरक्षा जैसे विषयों को शामिल किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान प्रसिद्ध पावर इंजीनियर डॉ. राजेश अरोरा ने सभी अभियंताओं को संस्थान में कार्यस्थल सुरक्षा की शपथ दिलाई। उन्होंने कंपनी की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी पर जोर देते हुए सुरक्षित कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए। इससे ग्रिड संचालन में सुरक्षा मानकों का पालन होगा।
हाईवोल्टेज कार्य में सुरक्षा ही सफलता का आधार
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. राजेश अरोरा ने सत्र के दौरान अभियंताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बिजली क्षेत्र में काम करते समय तकनीकी दक्षता के साथ सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता भी बेहद जरूरी है। एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों और ट्रांसमिशन लाइनों पर काम करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में कर्मचारियों को हमेशा निर्धारित मानकों, प्रक्रियाओं और सर्वोत्तम कार्य पद्धतियों का पालन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि किसी भी हादसे को रोकने के लिए कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों को प्राथमिकता देना आवश्यक है। सभी अभियंताओं ने अपने सेवाकाल में सुरक्षित और जिम्मेदार कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया, जिससे हादसों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
नवीन तकनीकों से मजबूत होगा ट्रांसमिशन का ढांचा
इस प्रशिक्षण शिविर में शामिल 60 जूनियर इंजीनियरों को बिजली आपूर्ति को बेहतर और निर्बाध बनाने के गुर सिखाए जा रहे हैं। एमपी ट्रांसको के अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य नए इंजीनियरों को ट्रांसमिशन क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों और आपरेशनल प्रक्रियाओं से परिचित कराना है। बदरपुर स्थित संस्थान में चल रहे इस विशेष सत्र के माध्यम से बिजली कंपनी के बुनियादी ढांचे को अधिक मजबूत और आधुनिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये सभी नए अधिकारी प्रदेश भर में फैले कंपनी के विभिन्न सबस्टेशनों और ग्रिडों पर अपनी सेवाएं देंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस व्यावहारिक ट्रेनिंग से राज्य के ट्रांसमिशन सिस्टम का संचालन अधिक विश्वसनीय, कुशल और सुरक्षित बनेगा।
