जबलपुर। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व यानी नौरादेही से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहाँ एक करीब 1 से डेढ़ साल उम्र की बाघिन को बेहद गंभीर और नाजुक हालत में जबलपुर स्थित वेटरनरी कॉलेज के स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ में इलाज के लिए लाया गया है। इस बाघिन में जानलेवा कैनाइन डिस्टेंपर वायरस होने की आशंका जताई जा रही है, जिसने पूरे वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खलबली मचा दी है। बाघिन के पैरों में गंभीर सूजन है और शरीर के अंदरूनी हिस्सों में भी चोटें पाई गई हैं। उसकी नाज़ुक स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत ड्रिप चढ़ाई गई है और वायरस की पुष्टि के लिए आवश्यक नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं।
जटिल बीमारियों के डर से जबलपुर में इलाज
पहले इस घायल बाघिन को भोपाल के वन विहार ले जाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के खतरे को देखते हुए रास्ते में ही निर्णय बदलकर उसे जबलपुर वेटरनरी कॉलेज रेफर कर दिया गया। जानकारी के अनुसार यह वही बाघिन है जिसने 2 दिन पहले वन विभाग के एक कर्मचारी पर जानलेवा हमला किया था। इस घटना के बाद से ही वन विभाग सतर्क हो गया था और बाघिन को रेस्क्यू करने के लिए विशेष टीम बुलाई गई थी। अब पूरी स्थिति पर वन विभाग की नजर बनी हुई है और वैज्ञानिक तरीके से उसके स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है।
अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ी असमंजस की स्थिति
बाघिन के स्वास्थ्य को लेकर चल रही इस गंभीर प्रक्रिया के बीच प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने को लेकर खींचतान देखी जा रही है। जब इस मामले में स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ की डायरेक्टर डॉ. शोभा जावरे से जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और मामला वाइल्ड लाइफ पीसीसीएफ के स्तर पर देखने की बात कही। वहीं नौरादेही टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि उन्होंने इलाज के लिए बाघिन को जबलपुर भेजा है, लेकिन उससे संबंधित मेडिकल रिपोर्ट या अन्य जानकारी साझा करना अब केंद्र की निदेशक के अधिकार क्षेत्र में आता है। दोनों ही अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं, जिससे बाघिन के इलाज की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
