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नगर निगम: विकास में रोड़ा अटकाने वाले दो ठेकेदार हुए ब्लैकलिस्टेड,जमानत राशि जब्त



जबलपुर। जबलपुर नगर निगम ने विकास कार्यों में बरती गई घोर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए दो निर्माण फर्मों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की है। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने मेसर्स तनुश्री कंस्ट्रक्शन और विजय एसोसिएट्स के अनुबंध तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं। इन दोनों फर्मों को विकास कार्यों में देरी और बार-बार निर्देशों के बावजूद काम शुरू न करने का दोषी पाया गया है। मेसर्स तनुश्री कंस्ट्रक्शन का 25000 रुपये का परफॉर्मेंस गारंटी जब्त कर उसे एक वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, जबकि विजय एसोसिएट्स की 57849 रुपये की राशि राजसात करते हुए उन्हें नगर निगम के सभी विभागों से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। भविष्य में पुनः निविदा प्रक्रिया से निगम को होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई भी इन्हीं ठेकेदारों से की जाएगी।

आखिर क्यों आई कार्रवाई की नौबत

​नगर निगम ने वार्ड 72 के तहत कंचन विहार कॉलोनी में एम-30 सीसी सड़क निर्माण के लिए मई 2025 में तनुश्री कंस्ट्रक्शन को कार्यादेश जारी किया था। बार-बार नोटिस और फोन के माध्यम से निर्देश देने के बावजूद ठेकेदार ने कार्य स्थल पर काम शुरू करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। नागरिकों की सुविधाओं को नजरअंदाज करना प्रशासन को भारी पड़ा। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि जनहित के कार्यों में इस तरह की सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके चलते ठेकेदार का टेंडर निरस्त कर उसकी 25000 रुपये की परफॉर्मेंस राशि राजसात कर ली गई है। आगामी एक साल तक यह फर्म निगम के किसी भी निर्माण कार्य में भाग नहीं ले सकेगी।

​ठप पड़े विकास कार्यों के लिए फिर होंगे टेंडर

​दूसरी ओर संभाग 06 के पंडित दीनदयाल उपाध्याय वार्ड के मदर टेरेसा नगर स्थित विवेकानंद गार्डन और श्री राम वाटिका गार्डन में बाउंड्री वॉल व पाथवे निर्माण का जिम्मा विजय एसोसिएट्स को दिया गया था। मई 2025 में आदेश मिलने के बाद भी संबंधित ठेकेदार ने काम शुरू नहीं किया। बार-बार चेतावनी के बाद भी ठेकेदार ने जानबूझकर कार्य में बाधा उत्पन्न की और निगम की छवि धूमिल की। इस पर कार्रवाई करते हुए निगम ने ठेकेदार का अनुबंध खत्म कर 57849 रुपये की राशि जब्त कर ली है। साथ ही फर्म को भविष्य के लिए हर विभाग से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इन कार्यों के लिए जल्द ही नई निविदाएं बुलाई जाएंगी और दोबारा टेंडर प्रक्रिया में आने वाली अतिरिक्त लागत की वसूली भी इन्हीं जिम्मेदार ठेकेदारों से की जाएगी।

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