जबलपुर। ग्रामीण इलाकों में घरों और दुकानों से अवैध रूप से संचालित किए जा रहे निजी स्कूलों के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। जिला प्रशासन की ओर से इन स्कूलों की जांच के लिए गठित विशेष दल की सुस्त कार्यप्रणाली से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता घनश्याम सिंह लोधी ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को सीधे शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद शहपुरा-भिटौनी और बरगी क्षेत्र के 23 स्कूलों की जांच के लिए 6 सदस्यीय दल का गठन हुआ था, लेकिन 2 सप्ताह बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट का अता-पता नहीं है। जिम्मेदार अधिकारी जांच में लेटलतीफी कर रहे हैं, जिससे शिक्षण संस्थानों के संचालकों के हौसले बुलंद हैं और प्रशासनिक गंभीरता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।
जांच दल की रिपोर्ट के इंतजार में फंसी कार्रवाई
प्रशासन द्वारा गठित 6 सदस्यीय संयुक्त जांच दल को इन 23 संदिग्ध निजी स्कूलों का भौतिक सत्यापन करके 3 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। इस दल में तहसीलदार शहपुरा, कार्यपालिक दंडाधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, विकासखंड स्रोत समन्वयक, राजस्व निरीक्षक और पटवारी को शामिल किया गया था। लेकिन तय समय सीमा निकलने के बावजूद अब तक रिपोर्ट का कोई भी हिस्सा सार्वजनिक नहीं हो सका है। अधिकारियों की इस चुप्पी से स्पष्ट है कि जांच प्रक्रिया कहीं न कहीं ठंडे बस्ते में चली गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जांच के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है और अवैध रूप से चल रहे शिक्षण केंद्रों को संरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है।
शिकायतकर्ता अब करेंगे अनशन
जांच प्रक्रिया में हो रही देरी से परेशान होकर शिकायतकर्ता घनश्याम सिंह लोधी ने अब कड़ा रुख अख्तियार करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक सप्ताह पहले फिर से पूरे दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन परिणाम शून्य ही रहा। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब उन्होंने 14 तारीख से अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ अनुविभागीय दंडाधिकारी एमएस रघुवंशी का कहना है कि जांच रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है, जिसके कारण आगे की कोई भी ठोस कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। प्रशासन का यह गोलमोल रवैया अब आम नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और सुधार की मांग जोर पकड़ रही है।
