नई दिल्ली. 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आवश्यक कर्मचारी डेटा जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है. आयोग ने यह फैसला कई मंत्रालयों और विभागों की ओर से समय पर डेटा संकलन पूरा नहीं कर पाने की जानकारी मिलने के बाद लिया है. यह जानकारी आयोग की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में दी गई है.
आयोग ने सभी संबंधित मंत्रालयों, विभागों और नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे संशोधित समयसीमा के भीतर आवश्यक जानकारी केवल आधिकारिक Data Collection Portal के माध्यम से ही अपलोड करें.
सिर्फ ऑनलाइन पोर्टल पर ही स्वीकार होगा डेटा
8वें वेतन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल के अलावा किसी अन्य माध्यम से भेजा गया डेटा स्वीकार नहीं किया जाएगा. आयोग के अनुसार ईमेल, हार्ड कॉपी, एक्सेल शीट, पीडीएफ फाइल या किसी अन्य माध्यम से भेजी गई जानकारी स्वत: अस्वीकार कर दी जाएगी. आयोग का कहना है कि डिजिटल पोर्टल के जरिए डेटा संग्रह से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित रहेगी.
वेतन और पेंशन सिफारिशों में होगी अहम भूमिका
यह डेटा संग्रह अभियान आयोग की समीक्षा प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है. मंत्रालयों और विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए वेतन, भत्तों और पेंशन संरचना में संशोधन संबंधी अपनी सिफारिशें तैयार करेगा. इससे करोड़ों कर्मचारियों और रिटायर्ड कर्मचारियों पर असर पडऩे की संभावना है.
6 और 7 जुलाई को दौरे पर आयोग
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में 8वां वेतन आयोग 6 और 7 जुलाई को भुवनेश्वर (ओडिशा) का दौरा करेगा. यह दौरा देशभर में चल रहे परामर्श कार्यक्रम का हिस्सा है. इस दौरान आयोग विभिन्न केंद्रीय सरकारी संगठनों, कर्मचारी संघों, मान्यता प्राप्त यूनियनों और संस्थानों से सुझाव प्राप्त करेगा. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार आयोग से मुलाकात करने के इच्छुक संगठनों और कर्मचारी प्रतिनिधियों को ऑनलाइन माध्यम से समय लेने के लिए आवेदन करना होगा.
2027 तक सरकार को सौंपी जाएगी अंतिम रिपोर्ट
8वां वेतन आयोग फिलहाल देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कर्मचारियों, संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव जुटा रहा है. आयोग का उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों की सेवा शर्तों, वेतन संरचना, भत्तों और पेंशन व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करना है. उम्मीद है कि आयोग 2027 के मध्य तक अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप देगा.
