जबलपुर। एमपी हाईकोर्ट ने 3 एक्सल बसों से अतिरिक्त टोल वसूली के बाद एमपीआरडीसी ने कंपनी को आदेश दिया था कि अधिक वसूली गई राशि लौटाई जाए। इसके बाद टोल कंपनी ने एमपीआरडीसी के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले में सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए टोल प्लाजा कंपनी की वसूली को न सिर्फ अवैध माना, बल्कि 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।मामला भोपाल-देवास हाईवे से जुड़ा हुआ है, जहां एमपीआरडीसी ने पाया कि 3 एक्सल बसों को मल्टी एक्सल ट्रक मानकर अधिक वसूली की गई थी, जो अवैध है। हाईकोर्ट ने कहा कि कंपनी जल्द से जल्द जुर्माने की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करे। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने भोपाल-देवास फोरलेन पर फास्टैग के जरिए तीन एक्सल बसों से अधिक टोल वसूली को अवैध ठहराते हुए टोल कंपनी को करीब 11 करोड़ रुपए प्रभावित वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों को लौटाने के निर्देश दिए हैं। मेसर्स देवास-भोपाल कॉरिडोर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज करते हुए एमपी रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी) के 21 मई, 2025 के आदेश को बरकरार रखा गया। कंपनी पर 25 हजार रुपए की लागत (कॉस्ट) भी लगाई गई है, जिसे मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करना होगा।
हाईकोर्ट ने टोल कंपनी की याचिका खारिज कर जुर्माना लगाया-
सुनवाई के दौरान कंपनी ने तर्क दिया था कि फास्टैग सिस्टम में तीन एक्सल बसों को तकनीकी रूप से मल्टी एक्सल वाहन की श्रेणी में दर्ज किए जाने के कारण अधिक टोल स्वत: कटता रहा, इसलिए कंपनी की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि फास्टैग केवल भुगतान का माध्यम है। टोल की दर या वाहन की श्रेणी तय करने का अधिकार उसे नहीं है। टोल हमेशा रियायत समझौते और सरकारी अधिसूचना के अनुसार ही वसूला जाएगा। 30 जून, 2007 के रियायत समझौते का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि इसमें बस और मल्टी एक्सल ट्रक की अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित हैं। यदि सॉफ्टवेयर की गलत मैपिंग के कारण अधिक टोल वसूला गया है तो इसकी जिम्मेदारी टोल संचालक की होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अप्रैल 2022 से जिन भी वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों से अतिरिक्त राशि वसूली गई है, उन्हें रिफंड दिया जाएगा।