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जीएसटी पोर्टल की कमियों को दूर करने इंदौर में बनी अहम रणनीति


जबलपुर से अभिषेक ध्यानी ने उठाई जीएसटी ट्रिब्यूनल के गठन की मांग

जबलपुर। इंदौर में आयोजित जीएसटी की शिकायत निवारण समिति (जीआरसी) की महत्वपूर्ण बैठक में जबलपुर का पक्ष प्रमुखता से रखा गया। शहर के जाने माने अधिवक्ता अभिषेक ध्यानी ने इस बैठक में शामिल होकर क्षेत्र के करदाताओं और व्यापारियों की समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाया। बैठक में केंद्रीय मुख्य आयुक्त मानस राजन मोहंती, राज्य आयुक्त अनय द्विवेदी, श्रीमती तन्वी हुड्डा, फराज अहमद और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यापार संघों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस उच्च स्तरीय बैठक में कर प्रणाली को बेहतर बनाने और स्थानीय स्तर पर आ रही व्यावहारिक दिक्कतों के समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई। उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता अभिषेक ध्यानी को हाल ही में जीएसटी की शिकायत निवारण समिति का सदस्य मनोनीत किया गया है। उन्हें केंद्रीय जीएसटी के मुख्य आयुक्त और जीआरसी के अन्य सदस्यों ने इस जिम्मेदारी के लिए चुना है।

​अदालती प्रकरणों के साथ ट्रिब्यूनल पर हुई चर्चा

​बैठक के दौरान अभिषेक ध्यानी ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में जीएसटी से जुड़े लंबित प्रकरणों का मुद्दा उठाया। उन्होंने टैक्स विवादों के जल्द निपटारे के लिए जीएसटी ट्रिब्यूनल के गठन की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही अपील प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी बाधाओं और व्यापारियों को होने वाली परेशानियों को समिति के सामने रखा। उन्होंने बताया कि किस तरह कानूनी और प्रक्रियागत उलझनों के कारण व्यावसायिक वर्ग को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका समाधान समय पर होना बेहद जरूरी है।

​आईटीसी व तकनीकी सुधारों पर जोर

​जीआरसी की इस बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी से जुड़ी शिकायतों पर भी गहन मंथन हुआ। ध्यानी ने बताया कि कई बार तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न या फॉर्म समय पर फाइल नहीं कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में पोर्टल की खामियों को दूर करने और करदाताओं को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई। समिति ने इन विषयों को गंभीरता से लेते हुए भविष्य की कार्ययोजना पर विचार किया ताकि सिस्टम में और अधिक पारदर्शिता लाई जा सके।

​जीआरसी की भूमिका और उत्तरदायित्व पर मंथन

​जीएसटी के तहत काम करने वाली यह समितियां टैक्सपेयर्स और टैक्स अथॉरिटीज के बीच एक पुल के रूप में कार्य करती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य प्रोसेस से जुड़ी मुश्किलों और आईटी संबंधी गड़बड़ियों का समय पर निराकरण करना है। हर 3 महीने में होने वाली इन बैठकों के माध्यम से आम और खास दोनों तरह के मामलों की जांच की जाती है। यदि किसी समस्या के समाधान के लिए नियमों या नोटिफिकेशन में बदलाव की जरूरत होती है, तो यह समिति मामले को सीधे जीएसटी काउंसिल सचिवालय या सीबीआईसी को भेजने का काम भी करती है।

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