जबलपुर। निजी स्कूलों द्वारा की गई मनमानी फीस वृद्धि और बुक सेलर्स के साथ मिलकर किए गए भ्रष्टाचार के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने आरोपी स्कूल प्रिंसिपल्स और बुक सेलर्स की ओर से दायर याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई को कोर्ट ने सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की अनियमितताएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
न्यायिक हस्तक्षेप और याचिकाएं खारिज
निजी स्कूलों के प्रबंधन और पुस्तक विक्रेताओं ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कराने के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली थी। आरोपियों का तर्क था कि प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई नियमों के दायरे से बाहर है। हालांकि न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने इन तर्कों को अमान्य कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने माना कि कॉपी-किताबों के व्यवसाय में कमीशनखोरी के जो सबूत सामने आए हैं, उन्हें प्रारंभिक स्तर पर नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं होगा।
फर्जी आईएसबीएन नंबर और मिलीभगत का खुलासा
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि जबलपुर के कई प्रतिष्ठित निजी स्कूलों ने चुनिंदा बुक सेलर्स के साथ साठगांठ की थी। इन दुकानों से अभिभावकों को महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि स्कूलों में ऐसी डुप्लीकेट किताबें पाठ्यक्रम में शामिल की गईं, जिन पर फर्जी आईएसबीएन नंबर अंकित थे। यह न केवल आर्थिक धोखाधड़ी है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है। प्रशासन की जांच में पाया गया कि प्रकाशकों और स्कूल संचालकों ने मिलकर एक बड़ा सिंडिकेट खड़ा कर लिया था, जिससे करोड़ों रुपये का अवैध मुनाफा कमाया गया।
जिला प्रशासन की कार्रवाई और प्रभावित स्कूल
जिला प्रशासन ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए 11 स्कूलों के प्रबंधन और संबंधित बुक सेलर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। इन स्कूलों में क्राइस्ट चर्च बॉयज एंड गर्ल्स, सेंट ए Aloysius, स्टेमफील्ड और अन्य प्रमुख संस्थान शामिल हैं। प्रशासन की टीम ने जब बुक स्टोर पर छापेमारी की थी, तब भारी मात्रा में अवैध रूप से मुद्रित सामग्री बरामद हुई थी। इसी आधार पर पुलिस ने जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामले पंजीबद्ध किए थे। कोर्ट के ताजा फैसले ने प्रशासन के मनोबल को बढ़ाया है और अब जांच की गति तेज होने की उम्मीद है।
पुलिस अधीक्षक को दिए निर्देश
उच्च न्यायालय ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है कि इस पूरे प्रकरण की जांच यथाशीघ्र पूरी की जाए। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पुलिस बिना किसी दबाव के साक्ष्य संकलन करे और चालान पेश करे। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट को भी निर्देश दिए गए हैं कि मामले की सुनवाई पूरी निष्पक्षता के साथ की जाए और गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाया जाए। न्यायालय के इस कड़े रुख से उन निजी स्कूलों में हड़कंप मचा है जो अब भी अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। अब मामले की अगली प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट में शुरू होगी, जहां आरोपितों को अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी।
