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जबलपुर: सड़क सुधार में देरी पर निगम की बड़ी कार्रवाई: ईगल पीसी स्नेहल कंपनी और उपयंत्री पर गिरी गाज

 


गौरीघाट से बंदरिया तिराहा तक पैदल निरीक्षण:

जबलपुर। नगर निगम सीमा के अंतर्गत अमृत-2 योजना के तहत पाइप लाइन बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत में बरती गई शिथिलता पर निगम प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने गौरीघाट रेत नाका से बंदरिया तिराहा तक किए गए कार्यों का पैदल भ्रमण कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कार्य स्थल पर पाई गई अव्यवस्थाओं और री-स्टोरेशन कार्य में देरी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ठेका कंपनी ईगल पीसी स्नेहल पर 5 लाख रुपए का आर्थिक दंड अधिरोपित किया गया है। इसके साथ ही कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे आरबी कंसल्टेंट और क्षेत्र के संबंधित उपयंत्री को भी अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतने के कारण कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

​सड़क मरम्मत कार्य में देरी पर हुई कार्रवाई

​अमृत-2 योजना के तहत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पाइप लाइन बिछाने का कार्य प्रगति पर है। गौरीघाट रेत नाका से बंदरिया तिराहा के बीच कंपनी द्वारा खुदाई तो की गई लेकिन पाइप लाइन डालने के पश्चात सड़क को पूर्ववत स्थिति में लाने का काम समय पर पूरा नहीं किया गया। निगमायुक्त ने मौके पर देखा कि सड़क की खुदाई के बाद अधूरा छोड़ दिए जाने से क्षेत्र में धूल के गुबार उड़ रहे हैं और राहगीरों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने और जनसुविधाओं की अनदेखी पर निगम प्रमुख ने ठेका कंपनी के विरुद्ध भारी भरकम जुर्माने की कार्रवाई सुनिश्चित की है।

​गुणवत्ता और समय-सीमा पर फ़ोकस

​क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि शहर में चल रहे किसी भी विकास कार्य में गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विकास कार्यों के दौरान जनता को होने वाली परेशानियों को न्यूनतम रखा जाए। निर्माण कार्यों में लेटलतीफी करने वाली एजेंसियों पर निरंतर निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि हर परियोजना की एक निश्चित समय सीमा होती है और यदि निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण नहीं होता है तो इसके लिए संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेह होंगे।

​फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान

​पैदल चलने वाले नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निगमायुक्त ने सड़क किनारे बने फुटपाथों की स्थिति का भी अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि फुटपाथों पर किए गए सभी प्रकार के अस्थाई और स्थाई अतिक्रमणों को तत्काल हटाया जाए। फुटपाथों को पूरी तरह खाली कराया जाए ताकि नागरिकों को मुख्य सड़क पर चलने के लिए मजबूर न होना पड़े। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और यातायात का दबाव भी कम होगा। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में निरंतरता बनाए रखने की बात कही गई है।

​विभागों के बीच आपसी समन्वय पर जोर

​शहरी अधोसंरचना के विकास के लिए निगमायुक्त ने सीवर, पेयजल और लोककर्म विभाग के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता जताई। अक्सर यह देखा जाता है कि एक विभाग द्वारा सड़क निर्माण के बाद दूसरा विभाग खुदाई शुरू कर देता है, जिससे सरकारी धन और समय दोनों की बर्बादी होती है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय बनाकर काम करने को कहा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सिटी ब्यूटीफिकेशन और उद्यान विभाग द्वारा किए जा रहे सौंदर्यीकरण कार्यों की भी समीक्षा की और आवश्यक सुधार के सुझाव दिए।

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