जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे सहित देश के उन हजारों रेल कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है जिनका तबादला दूसरे जोन या प्रोजेक्ट्स में होता रहता है। अब उन्हें ट्रांसफर होने पर पुराना रेलवे आवास नहीं छोडऩा होगा। रेलवे बोर्ड ने एक नया आदेश 18 मार्च को जारी कर पुराने रेलवे क्वार्टर को अपने पास रखने (रिटेंशन) के नियमों में बड़ी ढील दी है।
सामान्य तौर पर रेलवे कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब उनका ट्रांसफर किसी दूसरे शहर में हो जाता है। ऐसे में उन्हें अपना पुराना रेलवे क्वार्टर खाली करना पड़ता है, जिससे परिवार और बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता है।
पमरे सहित इन जोनों को रियायत
अब कुछ खास जोन और प्रोजेक्ट्स में ट्रांसफर होने पर कर्मचारी अपना पुराना घर रिटेन (पास रख) सकेंगे। इसे दो श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में निर्धारित लाइसेंस फीस पर-अगर किसी कर्मचारी का ट्रांसफर एसईसीआर, डब्ल्यूसीआर, ईसीओआर, एनईआर, ईसीआर, एसडब्ल्यूआर जैसी रेलवे, यूनिट्स या आरसीएफ, एमसीएफ जैसी वर्कशाप में होता है, तो वे तय फीस देकर पुराना घर रख सकते हैं।
प्रत्येक वर्ष रिन्यू नहीं कराना होगा
दूसरी श्रेणी में सामान्य लाइसेंस फीस पर- अगर पोस्टिंग नार्थ फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर), साउथ कोस्ट रेलवे (एससीओआर), रायगड़ा (ओडिशा) या जम्मू जैसे नए डिवीजनों और यूएसबीआरएल जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में होती है, तो कर्मचारी सामान्य किराए पर ही पुराना घर रख पाएंगे। इस सुविधा हर साल रिन्यू नहीं कराना पड़ेगा।
अगले आदेश तक यह सुविधा जारी रहेगी
रेलवे बोर्ड ने साफ कर दिया है कि जब तक बोर्ड की तरफ से अगला कोई आदेश नहीं आता, तब तक यह सुविधा जारी रहेगी। यानी अब कर्मचारियों को बार-बार एक्सटेंशन की चिंता नहीं करनी होगी। अब कर्मचारी बिना किसी मानसिक तनाव के दुर्गम क्षेत्रों या नए प्रोजेक्ट्स में काम कर सकेंगे। यह आदेश 18 मार्च को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
