जबलपुर। मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर अब राज्य कर्मचारी संघ ने बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश के शिक्षकों के मान-सम्मान और हितों की रक्षा के लिए संघ द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। इस संबंध में संघ के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह ने जबलपुर जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय को दूरभाष पर विस्तृत जानकारी दी है। संघ का मानना है कि शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कानूनी मार्ग अपनाना अनिवार्य हो गया है।
सरकार की उदासीनता के बाद संघ ने संभाली कमान
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने पूर्व में संपूर्ण प्रदेश स्तर पर आंदोलन कर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा था। संघ की मांग थी कि मध्य प्रदेश सरकार स्वयं माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका प्रस्तुत करे। लंबे समय तक प्रतीक्षा करने के बाद भी जब शासन की ओर से इस दिशा में कोई ठोस पहल होती नहीं दिखी, तब संघ ने स्वयं के स्तर पर याचिका दायर करने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। शिक्षकों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि पात्रता परीक्षा से जुड़े विसंगतिपूर्ण पहलुओं पर पुनः न्यायिक विचार हो सके।
याचिका दायर करने टीम गठित
सुप्रीम कोर्ट में विधिक प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए संघ ने एक विशेष टीम को अधिकृत किया है। इसमें संयोजक निरंजन सिंह घुरैया और सहसंयोजक अशोक दीपेरा के साथ आर डी प्रदेश मंत्री जितेंद्र शाक्य, भोपाल जिला अध्यक्ष एवं संभाग उपाध्यक्ष नारायण चतुर्वेदी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस निर्णय का जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय, बृजेश मिश्रा, रजनीश पांडेय, के जी पाठक, दाल चंद पासी, योगेन्द्र मिश्रा, बंटी मिश्रा, राम शंकर शुक्ला, मंसूर वेग, गगन चौबे, राकेश उपाध्याय, विनय नामदेव और सतीश उपाध्याय ने पूर्ण समर्थन किया है।
