मानस भवन में विद्यार्थियों के संस्कार निर्माण हेतु विशेष कार्यशाला का आयोजन
जबलपुर मानस भवन में सोमवार 23 मार्च 2026 को बीएपीएस स्वामिनारायण संस्था की ओर से चलो बनें आदर्श कार्यक्रम का औपचारिक आगाज किया गया। इस शैक्षणिक और संस्कारिक प्रकल्प के शुभारंभ अवसर पर जबलपुर जिले के विभिन्न स्कूलों से बड़ी संख्या में प्राचार्य और शिक्षक सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का प्राथमिक केंद्र बिंदु विद्यार्थियों के भीतर नैतिक मूल्यों का बीजारोपण करना और उन्हें शिक्षा के साथ-साथ बेहतर नागरिक बनाना तय किया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में संस्कारों की महत्ता
समारोह का आरंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन की रस्म के साथ किया गया। प्रथम सत्र के दौरान प्रशासनिक और संस्थागत प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। इसमें कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी और डीपीसी योगेश शर्मा ने सहभागिता की। बी.ए.पी.एस. स्वामिनारायण मंदिर जबलपुर के कोषाध्यक्ष पूज्य मुनिदर्शन स्वामी और संस्था के अन्य संतों ने भी इस दौरान मंच साझा किया। दूसरे सत्र में विधायक अशोक रोहाणी और शहर भाजपा अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अतिथियों ने शिक्षा के क्षेत्र में संस्कारों की महत्ता पर अपने विचार साझा किए।
चलो बनें आदर्श मोबाइल एप हुआ एक्टिव
विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए चलो बनें आदर्श मोबाइल एप्लिकेशन पेश किया गया है। इस एप्लिकेशन के माध्यम से जिले के सभी विद्यालयों को विशेष प्रेरणादायी वीडियो और शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। नेशनल प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर तिलक मोदी ने इस प्रोजेक्ट की विस्तृत ट्रेनिंग शिक्षकों को दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार यह डिजिटल माध्यम छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगा। इस तकनीकी पहल का लक्ष्य कक्षा के भीतर ही बच्चों को जीवन कौशलों और नैतिक शिक्षा से जोड़ना है।
शिक्षा और संस्कारों पर आध्यात्मिक मार्गदर्शन
गुजरात के सारंगपुर से विशेष रूप से पधारे पूज्य ज्ञाननयनदास स्वामी ने सा विद्या या विमुक्तये विषय पर अपना संबोधन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक शिक्षा वही है जो व्यक्ति को बंधनों से मुक्त करे और उसे संस्कारवान बनाए। उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान के साथ चारित्रिक उत्थान भी आवश्यक है। पूज्य स्वामी ने बीएपीएस संस्था द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न मानवीय और शैक्षणिक प्रकल्पों की जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार शिक्षक बच्चों के भविष्य निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
भारत के उज्ज्वल भविष्य हेतु शिक्षकों का संकल्प
कार्यशाला के अंतिम चरण में उपस्थित सभी शिक्षाविदों को बच्चों के संस्कार निर्माण की प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश दिए गए। शिक्षकों ने इस प्रकल्प के माध्यम से छात्रों के व्यवहार और चिंतन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की कार्ययोजना पर चर्चा की। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। उपस्थित सभी प्राचार्यों और शिक्षकों ने देश के भावी कर्णधारों को मूल्यनिष्ठ शिक्षा प्रदान करने और भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में योगदान देने का सामूहिक संकल्प लिया।


