जबलपुर। यूनाइटेड फोरम फॉर पावर एम्पलाई संगठन द्वारा प्रदेश की बिजली कंपनियों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कानूनी कदम उठाया गया है। संगठन के पूर्व क्षेत्र कंपनी संयोजक एसके पचौरी ने हाईकोर्ट में याचिका क्रमांक 9102/26 दिनांक 10 मार्च 2026 दायर कर नई भर्तियों की प्रक्रिया को चुनौती दी थी। इस याचिका के माध्यम से कोर्ट से यह मांग की गई थी कि वर्तमान में निकाली जा रही नई नियुक्तियों से पहले कार्यरत संविदा कर्मचारियों का विभाग में संविलियन सुनिश्चित किया जाए। याचिका में अन्य राज्यों के दो महत्वपूर्ण अदालती फैसलों का संदर्भ देते हुए तर्क दिया गया कि रिक्त पदों पर पहले से अनुभवी संविदा कर्मियों का हक बनता है, इसके पश्चात ही शेष बचे हुए पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
-इस फैसले से बदल जाएगी तस्वीर
इस महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में 23 मार्च को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पक्षकार श्री पचौरी के पक्ष में अपना निर्णय सुनाया है। अदालत ने वर्तमान में चल रही नई वैकेंसी की प्रक्रिया पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। श्री पचौरी ने इस जीत को संविदा कर्मचारियों के संघर्ष की सफलता बताया है। उनके अनुसार कोर्ट का यह फैसला प्रदेश के हजारों बिजली कर्मियों के लिए राहत भरा साबित होगा। वर्तमान में कोर्ट के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है, जिसके प्राप्त होते ही आदेश के प्रत्येक बिंदु की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। श्री पचौरी ने कहा कि हर स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा। संगठन अब इस फैसले के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई और संविलियन की प्रक्रिया को गति देने की तैयारी कर रहा है।
